Thursday, April 2, 2026

RCA, AMU Organises Mental Health Session to Boost Student Resilience

 


RCA, AMU Organises Mental Health Session to Boost Student Resilience

आरसीएद्वारा छात्रों की मानसिक सुदृढ़ता बढ़ाने पर कार्यक्रम का आयांजन

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी द्वारा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए “दबाव से प्रदर्शन तकः तनाव को एक उपकरण के रूप में उपयोग” विषय पर एक मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।

यह सत्र डॉफिरदोस जहांक्लीनिकल साइकोलॉजिस्टसेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रोजेक्टराष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशनजे.एनमेडिकल कॉलेजतथा डॉसमरीन हसन खानस्टूडेंट काउंसलरसेंटर फॉर स्किल डेवलपमेंट एंड करियर प्लानिंगवीमेंस कॉलेजएएमयू द्वारा संचालित किया गया। उन्होंने तनाव प्रबंधनभावनात्मक सुदृढ़ता विकसित करने तथा बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए एकाग्रता बढ़ाने के व्यावहारिक उपाय साझा किए।

कार्यक्रम में इंटरएक्टिव गतिविधियाँतनाव आकलन अभ्यास और सरल कोपिंग टेक्निक्स शामिल थींजिससे छात्रों को शैक्षणिक दबाव को बेहतर ढंग से समझने और प्रबंधित करने में सहायता मिली।

इस अवसर पर सहायक निदेशक डॉफिरोज अहमद ने दीर्घकालिक शैक्षणिक सफलता के लिए मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर बल दिया और छात्रों को तनाव को सकारात्मक दिशा में उपयोग करने तथा निरंतर प्रयासरत रहने के लिए प्रेरित किया।

इस सत्र में सहायक निदेशक डॉरबाब खान और संकाय सदस्य डॉहिबा इस्लाही भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ।

Wednesday, April 1, 2026

JMI's Department of Art History and Art Appreciation hosts an Art Exhibition

 

 JMI's Department of Art History and Art Appreciation hosts an Art Exhibition and Exhibition Design Workshop to commemorate 75 years

                                                                                                                                                                                                           जामिया के कला इतिहास एवं कला प्रशंसा विभाग ने 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया- कला प्रदर्शनी और प्रदर्शनी डिज़ाइन कार्यशाला का आयोजन

 

कला इतिहास एवं कला प्रशंसा विभाग ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) के ललित कला संकाय के 75 साल पूरे होने के जश्न के तौर पर, 'कलम महोत्सवके हिस्से के रूप में 25 से 27 मार्च 2026 तक एक कला प्रदर्शनी और एक प्रदर्शनी डिज़ाइन कार्यशाला का आयोजन किया।

 

प्रदर्शनी डिज़ाइन वर्कशॉप का संचालन श्री ओरून दास ने किया था और इसे दो भागों में बाँटा गया था। पहले सत्र का मुख्य उद्देश्य प्रदर्शनी डिज़ाइन के अंतर्गत स्पेस और मीनिंग की समझ विकसित करना थाइसमें प्रतिभागियों को इस बात पर गहराई से सोचने के लिए प्रोत्साहित किया गया कि स्थानिक व्यवस्थाओं के माध्यम से कहानियों या नैरेटिव का निर्माण किस प्रकार होता है। दूसरे भाग में एक व्यावहारिक गतिविधि शामिल थीजिसमें छात्रों को विभिन्न समूहों में बाँटा गया और उन्हें अपनी स्वयं की प्रदर्शनी के प्रस्तावों की परिकल्पना करने तथा उन्हें डिज़ाइन करने का कार्य सौंपा गयाइस प्रक्रिया ने उनमें सहयोगात्मक सोच और व्यावहारिक जुड़ाव को बढ़ावा दिया।

 

कार्यशाला के साथ-साथ, 25 से 27 मार्च 2026 तक "अक्रॉस द शोल्डर: द अपर ड्रेप्स इन इंडिजिनस टेक्सटाइल्स" (Across the Shoulder: The Upper Drapes in Indigenous Textiles) शीर्षक से एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। जामिया के कला इतिहास एवं कला प्रशंसा विभाग के छात्रों द्वारा क्यूरेट और आयोजित इस प्रदर्शनी में स्वदेशी वस्त्रों को उनकी निर्माण प्रक्रियाकरघे से पहलेकरघे पर और करघे के बाद के चरणों के माध्यम सेप्रदर्शित किया गया।

 

इन विभिन्न चरणों के माध्यम से वस्त्रों को प्रस्तुत करकेप्रदर्शनी ने वस्त्र परंपराओं के भौतिकसांस्कृतिक और श्रम-साध्य पहलुओं को उजागर कियाजिससे दर्शकों को स्वदेशी प्रथाओं के भीतर उनके महत्व की एक व्यापक समझ प्राप्त हुई।

 

प्रो. साइमा सईद

मुख्य जनसंपर्क अधिकारी

JMI's Sarojini Naidu Centre for Women’s Studies organizes workshop

 

     JMI's Sarojini Naidu Centre for Women’s Studies organizes                   workshop on university-industry linkages on the theme of                                                  'Communication in the                      

 जामिया के सरोजिनी नायडू महिला अध्ययन केंद्र में ‘कम्युनिकेशन इन डेवलपमेंट सेक्टरविषय पर यूनिवर्सिटी-इंडस्ट्री लिंकेज वर्कशॉप आयोजित

 

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सरोजिनी नायडू महिला अध्ययन केंद्र (SNCWS) ने 30 मार्च, 2026 को "मेक इट मेटरकम्युनिकेशन इन डेवलपमेंट सेक्टरविषय पर यूनिवर्सिटी-इंडस्ट्री लिंकेज वर्कशॉप का आयोजन किया। एसएनसीडब्ल्यूएस के मल्टी-पर्पस हॉल में आयोजित इस सत्र में छात्र और फैकल्टी शामिल हुएताकि वे अकादमिक शोधज़मीनी हकीकत और रणनीतिक संचार के महत्वपूर्ण संबंध को समझ सकें।

 

इस वर्कशॉप का संचालन स्टार्टकॉम कम्युनिकेशन की संस्थापक-निदेशक सुश्री रोशनी सुभाष ने किया। उन्होंने विकास संचार के क्षेत्र में अपने व्यापक अनुभव का इस्तेमाल करते हुए प्रतिभागियों को इस बात की इंटरैक्टिव पड़ताल में शामिल किया कि संचार किस तरह सामाजिक प्रभाव को आकार देता है। सत्र का समन्वय डॉ. तरन्नुम सिद्दीकी ने कियाऔर इसकी शुरुआती टिप्पणी डॉ. सुरैया तबस्सुम ने दी। सत्र की अध्यक्षता प्रो. मेहर फातिमा हुसैन ने की।

 

अपने शुरुआती संबोधन मेंसुश्री सुभाष ने प्रतिभागियों को रोज़मर्रा की ज़िंदगी मेंखासकर सोशल मीडिया के ज़रिए होने वाले संचार की प्रकृति पर सोचने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि कैसे शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट जैसे- रील्सहुक्स और रैपिड विज़ुअल्स का लगातार उपभोग हमारे अटेंशन स्पैन्स को प्रभावित करता है। उन्होंने आगाह किया कि इस बदलाव के अकादमिक लेखन और विकास कार्योंदोनों पर गहरे प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे इस बात के प्रति सचेत रहें कि डिजिटल आदतें किस तरह उनके अपने शोध और विकास संदेशों के समुदायों तक पहुँचने के तरीकोंदोनों को आकार देती हैं।

 

यह सत्र सिद्धांत से अभ्यास की ओर बढ़ाजिसके लिए मध्य प्रदेश के एक ज़िले से ली गई एक केस स्टडी का सहारा लिया गया। इस केस स्टडी मेंलैंगिक हिंसा का सामना कर रही महिलाओं ने सरकारी संस्थानों और सहायता केंद्रों से अपर्याप्त समर्थन मिलने के बावजूद सामूहिक रूप से इसका विरोध किया था। प्रतिभागियों को तीन समूहों में बाँटा गया और उन्हें उस संदर्भ में काम कर रहे एक स्वयं-सहायता समूह (self-help group) के लिए एक संचार रणनीति तैयार करने और फंडिंग प्रस्ताव का मसौदा बनाने के लिए बीस मिनट का समय दिया गया। इस अभ्यास ने ज़मीनी हकीकत को दानदाताओं और नीति-निर्माताओं के सामने पेश करने लायकप्रभावशाली और जवाबदेह कहानियों में बदलने की वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का अनुभव कराया।

 

समूहों ने अपने प्रस्ताव प्रस्तुत किएजिसके बाद टिप्पणियों और सुझावों का एक जीवंत आदान-प्रदान हुआ। इस इंटरैक्टिव प्रारूप ने छात्रों को कुछ कठिन सवालों से जूझने का अवसर दियाजैसे: किसी समुदाय की कहानी के किन पहलुओं को प्रमुखता दी जानी चाहिएऔर किन बातों को गोपनीय रखा जाना चाहिएकोई व्यक्ति वकालत की तात्कालिकता और प्रतिनिधित्व की नैतिकता के बीच संतुलन कैसे बनाता हैसुश्री सुभाष ने इस बात पर ज़ोर दिया कि विकास क्षेत्र में नैतिक संचार के लिए न केवल स्पष्टता और समझाने की क्षमता की आवश्यकता होती हैबल्कि उन समुदायों की गरिमा और स्वायत्तता के प्रति गहरी प्रतिबद्धता भी ज़रूरी है जिनका प्रतिनिधित्व किया जा रहा है।

 

सत्र का समापन छात्र वोलेंटियर अंका द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। छात्र वोलेंटियर मीनाक्षीदिव्यावैभव और अदिति ने भी कार्यशाला के सुचारू संचालन में अपना योगदान दिया।

 

प्रो. साइमा सईद


मुख्य जनसंपर्क अधिकारी          Development Sector'


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