Wednesday, August 19, 2026

जामिया के 2027 बैच के टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में 34 छात्र चुने गए


University Placement Cell, JMI kickstarts placements for Batch 2027 with 34 students selected at Tata Consultancy Services (TCS)

यूनिवर्सिटी प्लेसमेंट सेल, जामिया ने 2027 बैच के लिए प्लेसमेंट प्रक्रिया शुरू की; टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में 34 छात्र चुने गए


यूनिवर्सिटी प्लेसमेंट सेल (UPC), जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) को यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि B.Tech, M.Tech, MCA और M.Sc. प्रोग्राम के 2027 बैच के 34 छात्रों को कैंपस प्लेसमेंट प्रक्रिया के ज़रिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने चुना है।

 

एप्टीट्यूड टेस्ट 25 जुलाई 2026 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया के इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी फैकल्टी की कंप्यूटर प्रयोगशालाओं में आयोजित किया गया था। दो शिफ्ट में हुए इस ऑन-कैंपस असेसमेंट में कुल 300 छात्रों ने हिस्सा लिया। असेसमेंट के बाद, 117 छात्रों को इंटरव्यू प्रक्रिया के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया, जो 3 और 4 अगस्त 2026 को TCS ऑफिस में आयोजित की गई थी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, TCS ने आखिरकार 34 छात्रों को चुना। चुने गए छात्रों को तीन प्रोफाइल में पद की पेशकश की गई है:

 

•          TCS Prime: 1 छात्र का सालाना पैकेज ₹9.09 LPA से ₹11.59 LPA के बीच है।

•          TCS Digital: 26 छात्र, जिनका सालाना पैकेज ₹7.09 LPA से ₹7.39 LPA के बीच है।

•          TCS Ninja: 7 छात्र, जिनका सालाना पैकेज ₹3.46 LPA से ₹3.62 LPA के बीच है।

 

यूनिवर्सिटी प्लेसमेंट सेल लगातार जेएमआई छात्रों को अच्छी ट्रेनिंग और प्लेसमेंट के मौके देने की कोशिश करता है, ताकि वे प्रमुख संगठनों के साथ सफल और फायदेमंद करियर बना सकें।

 

ऑनरेरी डायरेक्टर प्रो. राहेला फारूकी, ऑनरेरी डिप्टी डायरेक्टर प्रो. सबाह खान और प्रो. रिहान खान सूरी (प्रोफेसर, TPO) ने चुने गए छात्रों को उनकी शानदार उपलब्धि पर बधाई दी और उनकी कड़ी मेहनत और लगन की सराहना की।

 

जामिया मिल्लिया इस्लामिया को इस उपलब्धि पर गर्व है और वह सभी चुने गए छात्रों को उनके सफल और संतोषजनक करियर के लिए दिल से बधाई और शुभकामनाएं देता है।

 

 



AMU NCC Unit Invites Students

AMU NCC Unit Invites Students for Enrolment              in 1/8 and 2/8 Companies

ALIGARH, August 18: The National Cadet Corps (NCC) Unit at the Aligarh Muslim University (AMU) has invited students to enrol in the 1/8 and 2/8 Companies of NCC, AMU, offering them opportunities for leadership development, personality building, physical and mental fitness and national integration.

NCC enrolment also provides several benefits, including eligibility for the Services Selection Board (SSB) interview, reserved seats in Agniveer and other forces, preference in Public Service Commission (PSC) and Union Public Service Commission (UPSC) examinations, and benefits in admission to various courses.

Interested students may visit the NCC Campus, located opposite the Department of Geography (behind the Vice Chancellor’s Lodge), AMU, for enrolment.

The NCC programme seeks to inculcate leadership, discipline, social responsibility and a spirit of service among students. The enrolment drive carries the message, “Be a Part of NCC – Build Leadership, Character & Nation,” reflecting the NCC motto, “Unity and Discipline.”

Tuesday, August 18, 2026

Department of Pathology,JNMC Organises Freedom Fest 2026


Prof Mohd Khalid, Prof Anjum Pervez, Prof Veena Maheshwari, Prof Athar Ansari, Prof. Nishat Afroz and other faculty members during the Freedom Fest 2026 at Department of Pathology

Department of Pathology Organises Freedom Fest 2026  

जेएन मेडिकल कालिज के पैथोलॉजी विभाग द्वारा ‘फ्रीडम फेस्ट 2026’ का आयोजन

अलीगढ़, 18 अगस्तः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग ने स्वतंत्रता की भावना को रचनात्मक अभिव्यक्ति, टीम भावना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से मनाने के लिए ‘फ्रीडम फेस्ट 2026’ का आयोजन किया। विभिन्न रचनात्मक और ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताओं से सजे इस आयोजन का समापन पुरस्कार वितरण एवं प्रतिभागियों के सम्मान समारोह के साथ हुआ।

समारोह में एएमयू के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर मोहम्मद अथर अंसारी, चिकित्सा संकाय के डीन प्रोफेसर मोहम्मद खालिद तथा जेएनएमसी के प्रधानाचार्य एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर अंजुम परवेज सहित विभाग के शिक्षक और प्रतिभागी मौजूद रहे।

स्वागत संबोधन में आयोजन अध्यक्ष प्रोफेसर निशात अफरोज ने कहा कि इस आयोजन ने चिकित्सक प्रतिभागियों को भारत की स्वतंत्रता की भावना से जुड़ते हुए सोचने, अपनी बात रखने और रचनात्मक कार्य करने का अवसर दिया। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. बुशरा सिद्दीकी ने कहा कि यह आयोजन साहस, बलिदान, संघर्षशीलता और एकता जैसे उन मूल्यों को सामने लाता है, जो देश की स्वतंत्रता से जुड़े हैं।

फेस्ट में पोस्टर एवं स्लोगन, तात्कालिक भाषण, कहानी लेखन, रंगोली, वाद-विवाद और स्वतंत्रता प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विभिन्न प्रतियोगिताओं का संचालन डॉ. शगुफ्ता कादरी, डॉ. रुकैया अफरोज, डॉ. सुहैलुर रहमान, डॉ. मुराद, डॉ. मोहम्मद राफे और डॉ. बुशरा सिद्दीकी ने किया।

प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन प्रोफेसर वीणा माहेश्वरी, प्रोफेसर महबूब हसन, प्रोफेसर निशात अफरोज, प्रोफेसर कफील अख्तर, प्रोफेसर रूबीना खान, प्रोफेसर मोहम्मद जसीम हसन, प्रोफेसर हिना अंसारी, डॉ. फिरोज आलम, डॉ. तबस्सुम नवाब और डॉ. उवैस अशरफ ने किया। सफल आयोजन में योगदान के लिए निर्णायकों और प्रतियोगिता समन्वयकों को भी सम्मानित किया गया।

पोस्टर एवं स्लोगन प्रतियोगिता में ‘तिरंगा वॉरियर्स’ की डॉ. सिदरा और डॉ. सदफ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। ‘भारत ब्रिलिएंस’ की डॉ. राजनेश और डॉ. प्रतीक्षा दूसरे तथा ‘आजादी हीरोज’ के डॉ. अवध और डॉ. रितु तीसरे स्थान पर रहे।

तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता में डॉ. राजनेश, डॉ. सदफ शकील और डॉ. शोभित सक्सेना ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया।

रंगोली प्रतियोगिता में डॉ. बनीश और डॉ. जॉली की जोड़ी प्रथम, डॉ. नाफे और डॉ. सारथ की जोड़ी द्वितीय तथा डॉ. प्रतीक्षा और डॉ. राजनेश की जोड़ी तृतीय स्थान पर रही।

वाद-विवाद प्रतियोगिता में डॉ. कुनिका, डॉ. फातिमा और डॉ. इकरा ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया, जबकि डॉ. शोभित सक्सेना को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।

स्वतंत्रता प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में डॉ. शोभित और डॉ. कुनिका की ‘टीम वल्लभ भाई पटेल’ ने प्रथम स्थान हासिल किया। ‘टीम सुभाष चंद्र बोस’ के डॉ. प्रतीक्षा और डॉ. अरबाज दूसरे तथा ‘टीम एनी बेसेंट’ के डॉ. सारथ और डॉ. अश्वंथ तीसरे स्थान पर रहे।

प्रोफेसर निशात अफरोज और डॉ. बुशरा सिद्दीकी को ‘फ्रीडम फेस्ट 2026’ के सफल आयोजन में उनके नेतृत्व और योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि फेस्ट ने प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मकता, ज्ञान और प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ स्वतंत्रता, एकता और राष्ट्रीय जिम्मेदारी के मूल्यों को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया।

एएमयू के स्वतंत्रता दिवस मुशायरे में शायरी की रंगारंग महफिल ने बांधा समां

 
Prof M Mohsin Khan Prof Siraj Ajmali, Prof M Mohsin khan Prof M Rizwan Khan, Prof Ahmad Mahfooz, Prof Zubair Shadab and others During the Independence Day Mushaira at University polytechnic

अलीगढ़, 17 अगस्तः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग की ओर से आयोजित पारंपरिक स्वतंत्रता दिवस मुशायरा पॉलिटेक्निक के असेंबली हॉल में आयोजित किया गया। इस साहित्यिक संध्या में देश और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर शायरों ने अपनी भावपूर्ण और प्रभावशाली रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वतंत्रता दिवस की भावना के अनुरूप मुशायरे में देशप्रेम, आजादी, सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी शायरी ने विशेष प्रभाव छोड़ा।

मुशायरे की अध्यक्षता सहकुलपति प्रो. मोहसिन खान ने की। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए इस साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में साहित्यिक रुचि विकसित करने और विश्वविद्यालय की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने एएमयू में मुशायरे की समृद्ध और लंबे समय से चली रही परंपरा का उल्लेख करते हुए पूर्व में आयोजित कुछ मुशायरों को याद किया। उन्होंने कहा कि मुशायरा एक महत्वपूर्ण साहित्यिक मंच है, जहां उभरते हुए युवा शायरों को आत्मविश्वास हासिल करने, अपनी काव्य अभिव्यक्ति को निखारने और वरिष्ठ शायरों तथा साहित्यकारों से प्रोत्साहन प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

कला संकाय के डीन प्रो. मोहम्मद रिजवान खान ने अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुशायरे की परंपरा और इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल शायरों और शायरी प्रेमियों का जमावड़ा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के शायरों के लिए साहित्यिक प्रशिक्षण का मंच भी है। उन्होंने कहा कि इस मंच पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थी भविष्य में उर्दू शायरी की दुनिया में महत्वपूर्ण स्थान बना सकते हैं। उन्होंने इस साहित्यिक संध्या के आयोजन के लिए उर्दू विभाग, विशेष रूप से विभागाध्यक्ष प्रो. सैयद सिराजुद्दीन अजमली को बधाई दी।

मुख्य अतिथि जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के उर्दू विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अहमद महफूज के अलावा प्रो. सैयद सिराजुद्दीन अजमली, डॉ. एम. आर. कासमी अलीग, डॉ. अदनान काशिफ, अमीर इमाम और मुशायरे के संचालक उर्दू शिक्षकों के व्यावसायिक विकास केंद्र के निदेशक प्रो. जुबैर शादाब सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए और स्थानीय शायरों ने अपनी प्रभावशाली रचनाएं प्रस्तुत कीं।

इस अवसर पर उर्दू विभाग के शिक्षक, विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी मौजूद रहे और शायरों की रचनाओं का आनंद लिया।

इससे पूर्व प्रो. सैयद सिराजुद्दीन अजमली ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और मुशायरे की समृद्ध परंपरा तथा वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस को एक खूबसूरत सुबह बताते हुए कहा कि हमें आजादी के महत्व को हमेशा याद रखना चाहिए, जो लंबे संघर्ष, बलिदान और दृढ़ संकल्प के बाद हासिल हुई है। उन्होंने कुलपति प्रो. नइमा खातून का संदेश भी पढ़कर सुनाया।

उन्होंने यह भी कहा कि देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम उर्दू शायरी की परंपरा में हमेशा से महत्वपूर्ण स्थान रखते रहे हैं। स्वतंत्रता संग्राम के दौर की शायरी से लेकर आज के समय में राष्ट्रीय गौरव और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी कविताओं तक, उर्दू शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों में एकता और सामूहिक भावना जगाने, स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वालों के बलिदान को सम्मान देने तथा आने वाली पीढ़ियों को देश की प्रगति और एकता में योगदान देने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि मुशायरा इस साहित्यिक और देशभक्ति की परंपरा को जीवित रखने के साथ-साथ युवा शायरों को अपने विचारों और आकांक्षाओं को अपनी विशिष्ट शैली में व्यक्त करने का सार्थक मंच भी प्रदान करता है।

मुशायरे का संचालन प्रो. जुबैर शादाब ने साहित्यिक गरिमा के साथ किया। शाम की महफिल में आजादी, सामाजिक वास्तविकताओं, बदलते समय, मानव जीवन के रहस्यों, प्रेम, विरह और अकेलेपन जैसे विषयों पर शायरों की रचनाओं ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

मुशायरे में अहमद महफूज, डॉ. अदनान काशिफ, गजनफर, महताब हैदर, सिराज अजमली, आलम खुर्शीद, डॉ. एम. आर. कासमी अलीग, शाहबुद्दीन साकिब, प्रो. अशहर कदीर, अमीर इमाम, आरिफ हसन खान, सरवर साजिद, सरफराज खालिद, अरीब उस्मानी, आली सबूर, अरमान, सफर नकवी, साईं अलीग, फरहीन शकील सहर और सद्दाम हुसैन मुजमर सहित अनेक शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

Sunday, August 16, 2026

AMU Celebrates 80th Independence Day

Prof Naima Khatoon along with Prof M Mohsin Khan, Prof Aasim Zafar and Prof Athar Ansari during the 80th Independence Day celebration

AMU Celebrates 80th Independence Day with Patriotic Fervour Focusing on Youth Power and Viksit Bharat 2047


एएमयू ने युवा शक्ति और विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ देशभक्ति के उत्साह से 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया

                                                                                                                                                                                         अलीगढ़, 15 अगस्तः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने आज देशभक्ति के उत्साह के साथ 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नइमा खातून ने युवाओं से अपनी ऊर्जा को ज्ञान, क्षमता और सार्थक कार्यों में बदलकर वर्ष 2047 तक विकसित और मानवीय भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
ऐतिहासिक स्ट्रेची हॉल में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद प्रो. नइमा खातून ने कहा कि इस वर्ष का विषय ‘विकसित भारत 2047 के लिए युवा शक्ति’ देश की विकास यात्रा के केंद्र में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत की पहली पीढ़ी के सामने यह सवाल था कि देश आजाद कैसे होगा, जबकि आज की पीढ़ी को यह सवाल पूछना चाहिए कि वह इस आजादी का उपयोग कर देश को कैसा बनाएगी।
विश्वविद्यालयों की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सबसे महत्वपूर्ण आधार उसके युवा नागरिकों का बौद्धिक विकास होगा। उन्होंने युवाओं में जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, कल्पनाशक्ति, नैतिक निर्णय क्षमता और उन समस्याओं को हल करने का साहस विकसित करने की आवश्यकता बताई, जिनका समाधान पिछली पीढ़ियां नहीं कर सकीं।
सर सैयद अहमद खान की शिक्षा संबंधी दूरदर्शी सोच का उल्लेख करते हुए प्रो. खातून ने कहा कि एएमयू को ऐसा संस्थान बनना होगा जो विद्यार्थियों को केवल रोजगार पाने के लिए ही नहीं, बल्कि दूसरों के लिए रोजगार और अवसर पैदा करने के लिए भी तैयार करे। उन्होंने इसे युवा ऊर्जा से युवा नेतृत्व और सक्रिय भागीदारी की ओर बढ़ने की प्रक्रिया बताया।
एएमयू की शैक्षणिक और व्यावसायिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय आज अपनी समृद्ध परंपराओं और भविष्य की नई संभावनाओं के संगम पर खड़ा है। विश्वविद्यालय के योगदान का विस्तार जनसेवा और शोध से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, डाटा साइंस विज्ञान, साइबर सुरक्षा, उन्नत चिकित्सा अनुसंधान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, भू-स्थानिक अनुसंधान, अक्षय ऊर्जा और हरित परिसर जैसी पहलों तक है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कई लाख रोगी ओपीडी पहुंचे, 1 लाख से अधिक मरीज भर्ती हुए और 32 हजार से अधिक बड़ी एवं छोटी शल्य चिकित्सा प्रक्रियाएं की गईं। अंतर्विषयक बाल हृदय केंद्र में 200 हृदय संबंधी शल्य चिकित्सा एवं अन्य प्रक्रियाएं भी की गईं।
प्रो. खातून ने कहा कि विकसित भारत केवल तकनीकी रूप से उन्नत ही नहीं, बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी टिकाऊ होना चाहिए। गलत सूचनाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से बौद्धिक स्वतंत्रता विकसित करने तथा किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पढ़ने, जांचने, तुलना करने और तथ्यों की पुष्टि करने की आदत डालने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि एएमयू को ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जहां युवा नई सोच के साथ जोखिम उठाकर प्रयोग कर सकें और नवाचार केवल कभी-कभार होने वाली गतिविधि न रहकर संस्थागत संस्कृति का हिस्सा बने। उन्होंने ऐसे एएमयू स्नातकों की कल्पना की जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ काम करते हुए मानवीय बुद्धिमत्ता को नजरअंदाज न करें, ऐसे वैज्ञानिक जो समाज को समझें, ऐसे उद्यमी जो अपनी जिम्मेदारियों को समझें, ऐसे विद्वान जो विश्वविद्यालय की सीमाओं से आगे की दुनिया को जानें और ऐसे नागरिक जो बिना नफरत के असहमति व्यक्त कर सकें तथा ईमानदारी से समझौता किए बिना सफलता हासिल करें।
प्रो. खातून ने अपने संबोधन का समापन ऐसे भारत के निर्माण के आह्वान के साथ किया जो केवल विकसित ही नहीं, बल्कि ‘गहराई से मानवीय’ भी हो। उन्होंने एएमयू समुदाय से अतीत को याद रखने, लेकिन उसमें बंधे न रहने तथा अपने मूल्यों से जुड़े रहते हुए भविष्य को अपनाने का आह्वान किया।                                                                                                             कार्यक्रम का संचालन एएमयू के कुलसचिव प्रो. आसिम जफर ने किया।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कुलपति के साथ सहकुलपति प्रो. एम. मोहसिन खान, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एम. अथर अंसारी, प्रॉक्टर प्रो. एम. नावेद खान सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों ने विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया। कुलपति ने सर सैयद हॉल के दक्षिणी और उत्तरी परिसर के लॉन में पौधे लगाए तथा विश्वविद्यालय स्वास्थ्य सेवा में बीमार विद्यार्थियों को फल वितरित किए।
इससे पूर्व विश्वविद्यालय की प्रमुख इमारतों, जिनमें प्रशासनिक भवन, मौलाना आजाद पुस्तकालय, विक्टोरिया गेट, विश्वविद्यालय पॉलिटेक्निक सभागार, बाब-ए-सैयद और कला संकाय भवन शामिल हैं, को तिरंगे की रोशनी से सजाया गया।
स्वतंत्रता दिवस समारोह के तहत उर्दू विभाग ने 14 अगस्त की पूर्व संध्या पर विश्वविद्यालय पॉलिटेक्निक के असेंबली हॉल में काव्य संध्या का भी आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सहकुलपति प्रो. एम. मोहसिन खान ने की। उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. सैयद सिराज अजमली ने अतिथियों का स्वागत किया और कुलपति प्रो. नइमा खातून का संदेश पढ़कर सुनाया।
अलीगढ़ के बाहर से आए शायरों में प्रो. अहमद महफूज, अमीर इमाम, डॉ. अदनान कासिम और एम. आर. कासमी अलीग के अलावा स्थानीय शायरों ने भी अपनी प्रभावशाली रचनाएं प्रस्तुत कीं।
उर्दू अकादमी के निदेशक प्रो. जुबैर शादाब ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि कला संकाय के डीन प्रो. मोहम्मद रिजवान खान ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
स्वतंत्रता दिवस समारोह ने स्वतंत्रता, बौद्धिक स्वाधीनता, सामाजिक जिम्मेदारी, राष्ट्रीय विकास और आपसी सौहार्द के मूल्यों के प्रति एएमयू की निरंतर प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित किया।


JMI Celebrates 80th Independence Day

 


JMI Celebrates 80th Independence Day with Patriotic Fervour;   Union Minister Jitan Ram Manjhi Graces the Occasion as Chief Guest

जामिया ने देशभक्ति के जोश के साथ 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया; केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी मुख्य अतिथि के तौर पर हुए शामिल

 

नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) ने आज देशभक्ति के जोश और भव्यता के साथ 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। डॉ. एम.ए. अंसारी ऑडिटोरियम में आयोजित मुख्य समारोह में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मामलों के माननीय केंद्रीय मंत्री श्री जीतन राम मांझी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। इस अवसर पर जेएमआई के कुलपति प्रो. मजहर आसिफ़ और रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी भी मौजूद थे।

 

कार्यक्रम की शुरुआत एनसीसी कैडेट्स द्वारा मुख्य अतिथि को 'क्वार्टर गार्ड' सलामी देने के साथ हुई। इसके बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और राष्ट्रगान गाया गया, जिससे माहौल में गंभीरता, गर्व और देशभक्ति की भावना भर गई।

 

औपचारिक कार्यक्रम में पवित्र आयतों का पाठ और 'जामिया तराना' की प्रस्तुति हुई, जो विश्वविद्यालय की समृद्ध परंपराओं और 'विविधता में एकता' के मूल्यों को दर्शाती है। कुलपति और रजिस्ट्रार ने छात्र कल्याण डीन प्रो. नीलोफर अफ़ज़ल के साथ मिलकर श्री मांझी को शॉल, स्मृति-चिह्न और पौधा भेंट कर सम्मानित किया। सम्मान और आभार के प्रतीक के तौर पर केंद्रीय मंत्री का एक चित्र भी भेंट किया गया।

 

विशिष्ट अतिथियों और उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए, जेएमआई की छात्र कल्याण डीन प्रो. नीलोफर अफ़ज़ल ने अपने संबोधन में याद दिलाया कि जामिया का इतिहास भारत के इतिहास से गहराई से जुड़ा है और यहाँ हमारे प्यारे तिरंगे को फहराते हुए न केवल देखा जाता है, बल्कि उसे महसूस भी किया जाता है।

 

माननीय केंद्रीय मंत्री के साथ उनकी टीम के सदस्य श्री दानिश रिज़वान और श्री सुरेंद्र प्रसाद पंत भी मौजूद थे। यह कार्यक्रम जेएमआई के छात्र कल्याण डीन कार्यालय की देखरेख में आयोजित किया गया था। सभा को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री श्री जीतन राम मांझी ने एक मज़दूर परिवार में घोर गरीबी में पले-बढ़े होने से लेकर मुख्यमंत्री और अब भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री बनने तक की अपनी असाधारण जीवन यात्रा के बारे में बात की। उन्होंने अपने निजी संघर्षों को साझा किया, जो उन्हें लगा कि बड़ी संख्या में साथी भारतीयों की जीवन-चुनौतियों को दर्शाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से गरीबी उन्मूलन के मुद्दे पर बात की और इस दिशा में अपने मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की। राष्ट्र-निर्माण में युवाओं की अहम भूमिका पर ज़ोर देते हुए, श्री मांझी ने कहा, "टेक्नोलॉजी अवसरों के दरवाज़े खोल सकती है, लेकिन अकेले यह सफलता सुनिश्चित नहीं कर सकती। सच्ची सफलता लगातार कड़ी मेहनत, प्रतिबद्धता और दृढ़ता से मिलती है।" उन्होंने छात्रों को केवल नौकरी खोजने के बजाय उद्यमी सोच विकसित करने और नौकरी देने वाले (जॉब क्रिएटर) बनने के लिए प्रोत्साहित किया, जो दूसरों को सशक्त बना सकें।

 

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 2047 में आज़ादी की 100वीं वर्षगांठ तक भारत को दुनिया की अग्रणी आर्थिक महाशक्ति बनाने के विज़न का ज़िक्र करते हुए, श्री मांझी ने MSME सेक्टर को इस विज़न की रीढ़ बताया। उन्होंने बताया कि यह सेक्टर भारत की GDP में लगभग 30.1 प्रतिशत का योगदान देता है और समावेशी आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।

 

युवाओं से "सोशल मीडिया को अपनी ताकत बनाएं, कमज़ोरी नहीं" का आग्रह करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने छात्रों को कौशल हासिल करने, नए विचार विकसित करने, उद्यमिता अपनाने और स्थानीय उत्पादों व विचारों को वैश्विक बाज़ारों तक ले जाने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने उनसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल मार्केटिंग जैसी उभरती टेक्नोलॉजी से खुद को लैस करने का भी आह्वान किया ताकि वे अपने अवसरों को बढ़ा सकें और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी पहचान बना सकें।

श्री मांझी ने करोड़ों परिवारों, खासकर महिलाओं, को समर्थन देने वाली विभिन्न MSME योजनाओं के साथ-साथ अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और समाज के अन्य वंचित वर्गों को लाभ पहुंचाने वाले कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला।

 

अपने संबोधन में, जेएमआई के वाइस चांसलर प्रो. मज़हर आसिफ़ ने आज़ादी के 80वें वर्ष के ऐतिहासिक अवसर पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आज़ादी के दिन के महत्व और राष्ट्र के प्रति यूनिवर्सिटी समुदाय की ज़िम्मेदारियों पर अपने विचार साझा किए। क्षेत्रीय बोली में उनकी सहज बातचीत ने उन्हें तुरंत दर्शकों का चहेता बना दिया। अमीर खुसरो और अल्लामा इक़बाल जैसे महान कवियों का ज़िक्र करते हुए, प्रो. आसिफ़ ने भारत की सभ्यतागत विरासत की विशिष्टता और अनोखेपन के बारे में बात की। उन्होंने कहा, "भारत हमेशा से ही ज्ञान का केंद्र रहा है और कवियों व विद्वानों ने इसे असाधारण सुंदरता और ज्ञान की भूमि के रूप में सराहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि आज़ादी का असली मतलब सभी नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए मिलकर काम करना है।

जेएमआई के रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी ने भारत के आज़ादी के संघर्ष के इतिहास को याद करते हुए दमनकारी औपनिवेशिक शासन के खिलाफ़ आज़ादी के दीवानों के हौसले और बलिदानों पर ज़ोर दिया। उन्होंने अंग्रेज़ों की "फूट डालो और राज करो" की नीति के बंटवारे वाले असर को रेखांकित किया, जिसने भारतीय समाज को जाति, धर्म, क्षेत्र और पहचान के आधार पर बांटने की कोशिश की और आखिरकार बंटवारे की त्रासदी का कारण बनी। महात्मा गांधी और जामिया मिलिया इस्लामिया के संस्थापकों में से एक हकीम अजमल खान के योगदान को याद करते हुए, प्रो. रिज़वी ने ज़ोर दिया कि सच्ची आज़ादी राजनीतिक संप्रभुता और आर्थिक आज़ादी से कहीं बढ़कर है। उन्होंने कहा कि इसकी जड़ें समाज के सभी वर्गों के लिए न्याय, समानता, सामाजिक सद्भाव और सामूहिक कल्याण में होनी चाहिए।

 

कार्यक्रम के अगले क्रम में जामिया के स्कूलों द्वारा एक सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया गया। इस कार्यक्रम में जामिया के सभी स्कूलों की सांस्कृतिक और कलात्मक प्रस्तुतियों का शानदार संगम देखने को मिला। मुशीर फातिमा नर्सरी स्कूल ने एक दिलचस्प एक्शन सॉन्ग पेश किया, जिसमें नन्हे प्रतिभागियों का उत्साह और मासूमियत झलक रही थी। इसके बाद एक शानदार संगीत कार्यक्रम हुआ, जिसने इस मौके के जश्न के माहौल को और बढ़ा दिया। चाइल्ड गाइडेंस सेंटर, डॉ. ज़ाकिर हुसैन मेमोरियल वेलफेयर सोसाइटी के विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों की एक खास प्रस्तुति ने उनके असाधारण हुनर, आत्मविश्वास और भागीदारी की भावना को उजागर किया। मिडिल स्कूल ने महिला स्वतंत्रता सेनानियों पर आधारित एक सार्थक प्रस्तुति दी, जिसमें भारत की आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाली महिलाओं के साहस और योगदान को याद किया गया। जामिया गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने "स्वर्णिम भारत कल आज कल" नाम का एक नृत्य-नाटक पेश किया, जिसमें अलग-अलग दौर से गुज़रते भारत के सफ़र और देश की समृद्ध विरासत व बदलते समय को दिखाया गया। सैयद आबिद हुसैन सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने एक दिल को छू लेने वाली कव्वाली पेश की, जिसने जश्न में पारंपरिक और आध्यात्मिक रंग भर दिया। कार्यक्रम का समापन जामिया सीनियर सेकेंडरी स्कूल (JSSS) द्वारा ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान पर आधारित एक विशेष जीवनी-नाटक के साथ हुआ, जिसमें उनके असाधारण साहस, देशभक्ति और देश के प्रति समर्पण को दिखाया गया। इस जश्न में जामिया की अपने छात्रों में देशभक्ति, एकता, साहस और सामाजिक ज़िम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दिखी, साथ ही उन्हें अपनी रचनात्मकता और हुनर दिखाने का मंच भी मिला। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिससे जश्न का गरिमापूर्ण समापन हुआ और आज़ादी, एकता, शांति और राष्ट्र सेवा के साझा मूल्यों को फिर से दोहराया गया। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 80वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न शाम तक जारी रहा। इसके तहत 15 अगस्त, 2026 को शाम 7:00 बजे डॉ. एम. ए. अंसारी ऑडिटोरियम में "जश्न-ए-आज़ादी" का आयोजन किया गया, जिसमें दिल को छू लेने वाले संगीत और उत्सव का माहौल था।

 

इस खास शाम के कार्यक्रम में जेएमआई के माननीय कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ़, रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी और डीन (छात्र कल्याण) प्रो. नीलोफ़र अफ़ज़ल की गरिमामयी उपस्थिति रही।

 

शाम का मुख्य आकर्षण नियाज़ी निज़ामी ब्रदर्स की दिलकश संगीत प्रस्तुति थी, जिसने स्वतंत्रता दिवस की भावना के साथ संगीत और जश्न को एक साथ पिरोया। इस कार्यक्रम ने जामिया परिवार के सदस्यों और मेहमानों को संगीत और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के माध्यम से देश की आज़ादी का जश्न मनाने का मौका दिया।

 

इस तरह, दिनभर चले इन समारोहों में राष्ट्रीय ध्वजारोहण फहराने की रस्म की गंभीरता, आज़ादी से जुड़े मूल्यों और ज़िम्मेदारियों पर चिंतन, जामिया के छात्रों की रचनात्मक प्रतिभा और दिल को छू लेने वाले संगीत की शाम शामिल रही। ये सभी चीज़ें विश्वविद्यालय की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और 'विविधता में एकता' की भावना को दर्शाती हैं।

 

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 80वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न ने आज़ादी, एकता, विविधता, शिक्षा, सामाजिक ज़िम्मेदारी और राष्ट्र-निर्माण के मूल्यों के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।

 

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