Wednesday, April 1, 2026

JMI's Sarojini Naidu Centre for Women’s Studies organizes workshop

 

     JMI's Sarojini Naidu Centre for Women’s Studies organizes                   workshop on university-industry linkages on the theme of                                                  'Communication in the                      

 जामिया के सरोजिनी नायडू महिला अध्ययन केंद्र में ‘कम्युनिकेशन इन डेवलपमेंट सेक्टरविषय पर यूनिवर्सिटी-इंडस्ट्री लिंकेज वर्कशॉप आयोजित

 

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सरोजिनी नायडू महिला अध्ययन केंद्र (SNCWS) ने 30 मार्च, 2026 को "मेक इट मेटरकम्युनिकेशन इन डेवलपमेंट सेक्टरविषय पर यूनिवर्सिटी-इंडस्ट्री लिंकेज वर्कशॉप का आयोजन किया। एसएनसीडब्ल्यूएस के मल्टी-पर्पस हॉल में आयोजित इस सत्र में छात्र और फैकल्टी शामिल हुएताकि वे अकादमिक शोधज़मीनी हकीकत और रणनीतिक संचार के महत्वपूर्ण संबंध को समझ सकें।

 

इस वर्कशॉप का संचालन स्टार्टकॉम कम्युनिकेशन की संस्थापक-निदेशक सुश्री रोशनी सुभाष ने किया। उन्होंने विकास संचार के क्षेत्र में अपने व्यापक अनुभव का इस्तेमाल करते हुए प्रतिभागियों को इस बात की इंटरैक्टिव पड़ताल में शामिल किया कि संचार किस तरह सामाजिक प्रभाव को आकार देता है। सत्र का समन्वय डॉ. तरन्नुम सिद्दीकी ने कियाऔर इसकी शुरुआती टिप्पणी डॉ. सुरैया तबस्सुम ने दी। सत्र की अध्यक्षता प्रो. मेहर फातिमा हुसैन ने की।

 

अपने शुरुआती संबोधन मेंसुश्री सुभाष ने प्रतिभागियों को रोज़मर्रा की ज़िंदगी मेंखासकर सोशल मीडिया के ज़रिए होने वाले संचार की प्रकृति पर सोचने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि कैसे शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट जैसे- रील्सहुक्स और रैपिड विज़ुअल्स का लगातार उपभोग हमारे अटेंशन स्पैन्स को प्रभावित करता है। उन्होंने आगाह किया कि इस बदलाव के अकादमिक लेखन और विकास कार्योंदोनों पर गहरे प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे इस बात के प्रति सचेत रहें कि डिजिटल आदतें किस तरह उनके अपने शोध और विकास संदेशों के समुदायों तक पहुँचने के तरीकोंदोनों को आकार देती हैं।

 

यह सत्र सिद्धांत से अभ्यास की ओर बढ़ाजिसके लिए मध्य प्रदेश के एक ज़िले से ली गई एक केस स्टडी का सहारा लिया गया। इस केस स्टडी मेंलैंगिक हिंसा का सामना कर रही महिलाओं ने सरकारी संस्थानों और सहायता केंद्रों से अपर्याप्त समर्थन मिलने के बावजूद सामूहिक रूप से इसका विरोध किया था। प्रतिभागियों को तीन समूहों में बाँटा गया और उन्हें उस संदर्भ में काम कर रहे एक स्वयं-सहायता समूह (self-help group) के लिए एक संचार रणनीति तैयार करने और फंडिंग प्रस्ताव का मसौदा बनाने के लिए बीस मिनट का समय दिया गया। इस अभ्यास ने ज़मीनी हकीकत को दानदाताओं और नीति-निर्माताओं के सामने पेश करने लायकप्रभावशाली और जवाबदेह कहानियों में बदलने की वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का अनुभव कराया।

 

समूहों ने अपने प्रस्ताव प्रस्तुत किएजिसके बाद टिप्पणियों और सुझावों का एक जीवंत आदान-प्रदान हुआ। इस इंटरैक्टिव प्रारूप ने छात्रों को कुछ कठिन सवालों से जूझने का अवसर दियाजैसे: किसी समुदाय की कहानी के किन पहलुओं को प्रमुखता दी जानी चाहिएऔर किन बातों को गोपनीय रखा जाना चाहिएकोई व्यक्ति वकालत की तात्कालिकता और प्रतिनिधित्व की नैतिकता के बीच संतुलन कैसे बनाता हैसुश्री सुभाष ने इस बात पर ज़ोर दिया कि विकास क्षेत्र में नैतिक संचार के लिए न केवल स्पष्टता और समझाने की क्षमता की आवश्यकता होती हैबल्कि उन समुदायों की गरिमा और स्वायत्तता के प्रति गहरी प्रतिबद्धता भी ज़रूरी है जिनका प्रतिनिधित्व किया जा रहा है।

 

सत्र का समापन छात्र वोलेंटियर अंका द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। छात्र वोलेंटियर मीनाक्षीदिव्यावैभव और अदिति ने भी कार्यशाला के सुचारू संचालन में अपना योगदान दिया।

 

प्रो. साइमा सईद


मुख्य जनसंपर्क अधिकारी          Development Sector'


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