Friday, January 23, 2026

मकर सङ्क्रान्ति के अवसर पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन

 


मकर सङ्क्रान्ति के अवसर पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन

 

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के संस्कृत विभाग द्वारा दिनाङ्क 15 जनवरी 2026 को मकर सङ्कान्ति के उपलक्ष्य में 'मकर सङ्कान्ति का सामाजिक एवं सांस्कृतिक निहितार्थविषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य मकर सङ्कान्ति की परम्परा एवं उसके वैज्ञानिक महत्त्व से छात्रों को अवगत कराना था।

 

मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. रामराज उपाध्यायविभागाध्यक्षपौरोहित्य विभागश्रीलाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयनई दिल्ली ने अपने वक्तव्य में मकर सक्रान्ति के शाब्दिक अर्थ को समझाते हुए बतलाया कि इस दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होता है। सूर्य इस दिन दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। उन्होंने बताया कि ज्योतिष के अनुसार बारह राशियों होती हैं। एव वर्ष में बारह महीने होते हैं। सूर्य प्रत्येक महीने एक राशि में संकमण करता है। संक्रमण के क्रम में वर्ष की छः महीने सूर्य का संक्रमण उत्तरायण में होता है एवं छः महीने की शेष छः राशियों में सूर्य दक्षिणायन रहता है। जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है तो सर्य का उत्तरायण प्रारम्भ हो जाता है। उत्तरायण का काल प्रकाश का काल माना जाता है। देवता भी इस उत्तरायण हेतु प्रतीक्षारत रहते हैं। इस काल की प्रतीक्षा महाभारत में शरशय्या पर पड़े भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए भी किया था। वस्तुतः मकर सङ्गान्ति का दिन उत्थानकाल का प्रारम्भिक दिन हैअतः इस दिन का विशेष महत्त्व है। यह भारत के अनेक राज्यों में धूमधाम से मनाया जाने वाला पर्व है। यह आध्यात्मिकता के साथ ही सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता को भी रेखाङ्कित करता है। खगोलीय दृष्टि से भारत की भौगोलिक स्थिति पृथिवी के उत्तरी गोलार्द्ध में है। मकर सङ्कान्ति के पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित रहता है अर्थात् सूर्य की दूरी भारत से बहुत दूर होती है। यही कारण है कि मकर सङ्क्रान्ति के पूर्व की रातें बड़ी एवं दिन छोटे होते है किन्तु मकर सङ्क्रान्ति के दिन से अर्थात् सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर अग्रसर होने लगता है फलस्वरूप रात्रि की अपेक्षा दिन का समय बढने लगता है।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. जयप्रकाश नारायण ने इस पर्व की सामाजिक प्रासङ्गिकता को रेखाङ्कित करते हुए कहा कि यह पर्व हमें सामाजिक एकता का सन्देश देता है। उन्होंने बताया कि यह पर्व भारत के अनेक प्रदेशों में मकर सङ्कान्तिखिचड़ीउत्तरायणीमाघीलोहड़ीपोंगल एवं बिहू आदि नामों से हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाता है। इस अवसर पर उन्होंने इस दिन बनाए जाने वाले व्यंजनों में प्रयुक्त तिल एवं गुड़ के वैज्ञानिक महत्व पर भी प्रकाश डाला।

 

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. सत्यप्रकाशओ.एस.डी.कुलपति ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए मकर सङ्क्रान्ति की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को रेखाङ्कित किया।

 

संस्कृत विभाग के सङ्गोष्ठी कक्ष में आयोजित इस व्याख्यान का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं वैदिक मंगलाचरण से हुआ। विभागाध्यक्ष प्रो. जय प्रकाश नारायण द्वारा मुख्य वक्ताअतिथि एवं उपस्थित श्रोताओं का वाचिक अभिनन्दन एवं स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. धनञ्जयमणि त्रिपाठी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मणिशङ्कर द्विवेदी द्वारा किया गया। अध्यापकोंशोधछात्रों एवं अन्य विभागीय छात्रों की सक्रिय उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया। शान्ति मन्त्र के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

 

प्रोसाइमा सईद                                                                                                                                   मुख्य जनसंपर्क अधिकारी

AMU Students Secure 12 Campus Placements Across Leading Companies

 

                           एएमयू के 12 छात्रों का प्रतिष्ठित कंपनियों में कैम्पस प्लेसमेंट में चयन

        अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के 12 छात्रों को  विश्वविद्यालय के प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट कार्यालय (जनरल) द्वारा आयोजित कैंपस भर्ती अभियानों के माध्यम से विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों में चयनित किया गया है।

चयनित छात्र प्रबंधन संकायअभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय तथा विदेशी भाषा विभाग से संबंधित हैं। इन छात्रों का चयन आईटीसी लिमिटेडपारुल विश्वविद्यालयविगर वेल्डिंगलैंससॉफ्ट और मानसी गंगा बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में हुआ है।

कठिन और बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद एमबीए कार्यक्रम के छात्र अमित जादौन और मोहम्मद फराज का चयन आईटीसी लिमिटेड में सेल्स ट्रेनी के रूप में हुआ। एमए (चीनी भाषा) के सलमान नईम और एमएचआरएम के अल्तमश तौकीर को लैंससॉफ्ट में रिक्रूटर के पद पर नियुक्ति मिली। एम.टेक. (कंप्यूटर साइंस) के छात्र शाह अहमद शाकिर अबू आसिम खान का चयन पारुल विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में हुआ। बी.टेक. के पीयूष शर्मा और बी.वॉक. (प्रोडक्शन) के मोनिस अंसारी को मानसी गंगा बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स में क्रमशः ग्रेजुएट इंजीनियर और साइट सुपरवाइजर के पद पर नियुक्त किया गया। इसके अलावा बी.टेक. के मोहम्मद सलमान और मोहम्मद फेहराब अंसारी तथा डिप्लोमा इंजीनियरिंग के साइम खान और नाजिम हुसैन का चयन विगर वेल्डिंग में सर्विस इंजीनियर ट्रेनी के रूप में हुआ है।

प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट अधिकारी (जनरल) साद हमीद ने कहा कि ये प्लेसमेंट विश्वविद्यालय के उद्योग जगत के साथ निरंतर संवाद और कौशल विकास पर केंद्रित प्रयासों का परिणाम है।

Tuesday, January 20, 2026

AMU NCC Cadets Participate in Army Attachment Camp at Meerut Cantonment



AMU NCC Cadets Participate in Army Attachment Camp at Meerut Cantonment

ALIGARH, January 20: 1 UP ENGR. COY., NCC, Aligarh Muslim University conducted NCC Army Attachment Camp from January 4 to 15, 2026, at the 63 Engineer Regiment, Meerut Cantonment.

18 cadets from AMU participated in the camp. The camp offered cadets valuable exposure to the functioning, training standards, and operational roles of the Corps of Engineers of the Indian Army.

Col. D. Dhadhwal, Officer Commanding, 1 UP ENGR. COY., NCC, interacted with the cadets during the training and obtained their feedback, and discussed measures to make future camps even more informative and effective.

Mr. Mohd Imran, Assistant Professor, ZH College of Engineering and Technology and Mr. Mohd Danish, Assistant Professor at University Polytechnic, AMU, who also serve as the Caretaking Officers of 1 UP ENGR. COY., NCC, Aligarh Muslim University played a vital role in guiding, motivating, and supporting the cadets during the whole training.

As part of the training schedule, cadets were introduced to various types of military bridges, with detailed explanations on their technical specifications, construction purposes, and operational importance.

The participating Cadets visited the IED Model Room, where cadets were briefed on different sensors used in improvised explosive devices. An introduction to mine warfare was provided, covering the technical data of different types of mines along with hands-on training in mine breaching techniques. The camp also featured drone training, where cadets were introduced to drone handling and basic operational procedures. Further adding to the practical exposure, cadets underwent weapon training, learning stripping, assembling, technical data, and firing positions of weapons such as LMG, INSAS, and CMG.

The combined exposure to drone operations, weapon handling, mine breaching, and tactical field movements left the cadets inspired, confident, and highly motivated to excel in NCC activities and pursue a career in the armed forces.

 

Prof Mohammad Gulrez addressing the programme at Department of Education

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Prof Mohammad Gulrez addressing the programme at Department of Education

एएमयू में उर्दू माध्यम सामाजिक विज्ञान शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

अलीगढ़, 20 जनवरीः अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शिक्षा विभाग द्वारा नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज (एनसीपीयूएल) के सहयोग से उर्दू माध्यम के सामाजिक विज्ञान शिक्षकों के लिए आयोजित शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आज से प्रारंभ हो गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता एएमयू के पूर्व कुलपति प्रो. मोहम्मद गुलरेज ने की। एनसीपीयूएल की सहायक निदेशक डॉ. शमा कौसर यजदानी मुख्य अतिथि रहींजबकि के. ए. निजामी सेंटर फॉर कुरआनिक स्टडीज के निदेशक प्रो. ए. आर. किदवई विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन शिक्षा विभाग की अध्यक्ष प्रो. निखत नसरीन ने कियाजबकि प्रो. साजिद जमाल सह-संयोजक रहे।

मुख्य अतिथि डॉ. शमा कौसर यजदानी ने उर्दू शिक्षा को बढ़ावा देने और उर्दू में शैक्षणिक सामग्री तैयार करने के लिए एनसीपीयूएल के प्रयासों पर प्रकाश डाला। वहीं प्रो. ए. आर. किदवई ने सामाजिक विज्ञान शिक्षण में स्पष्टताउचित भाषा प्रयोग और आलोचनात्मक सोच के महत्व पर जोर दिया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. मोहम्मद गुलरेज ने बौद्धिक विकास के लिए पठन-पाठन की आदत और भाषाओं की भूमिका को रेखांकित किया।

इससे पूर्व अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रो. निखत नसीरीन ने कहा कि यह कार्यक्रम उर्दू माध्यम सामाजिक विज्ञान शिक्षकों की कक्षा से जुड़ी समस्याओं और आवश्रूक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। प्रो. साजिद जमाल ने प्रतिभागियों को कार्यक्रम के उद्देश्य और रूपरेखा की जानकारी दी।

वक्ताओं ने सामाजिक विज्ञान शिक्षण को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप ढालने पर जोर दिया। 20 से 23 जनवरी तक चलने वाले इस चार दिवसीय कार्यक्रम में कुल 16 शैक्षणिक सत्र होंगेजिनका उद्देश्य उर्दू माध्यम शिक्षकों की पेशेवर क्षमता और कक्षा शिक्षण को मजबूत करना है।

Monday, January 19, 2026

Dr Mohd Khalid presenting the memento to Dr Huma Kazmi


 Dr Mohd Khalid presenting the memento to Dr Huma Kazmi during the Guest Lecture on Paediatric Heart Murmurs at JNMC

जेएनएमसी में अमेरिका की डा. हुमा काज़मी का बच्चों में हृदय की असमान्य ध्वनी पर अतिथि व्याख्यान

अलीगढ़, 17 जनवरीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग द्वारा डीन कार्यालय के समिति कक्ष में बच्चों में हृदय मर्मर (दिल की आवाज) का उपचार विषय पर एक अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया।

यह व्याख्यान अंतरराष्ट्रीय अतिथि संकाय सदस्यएएमयू की पूर्व छात्रा और अलीगढ़ मेडिकल एलुमनी एसोसिएशन ऑफ़ नॉर्थ अमेरिका (एएमएएएनए) की कनाडा लायज़न डॉ. हुमा काज़मी ने दिया। उन्होंने बच्चों में हृदय मर्मर जो दिल की एक असमान्य आवाज़ होती है और यह आवाज तब आती है जब दिल के अंदर खून का बहाव सामान्य तरीके से नहीं होता की जांच के लिए एक सुव्यवस्थित के प्रबंधन के बारे में बताया। जिसमें उन्होंने  क्लिनिकल जांच और रोगात्मक मर्मरों के बीच अंतर तथा आवश्यक जाँचों की आवश्यकता पर बल दिया। अपने अंतरराष्ट्रीय नैदानिक अनुभव के आधार पर उन्होंने बाल रोग अभ्यास से संबंधित व्यावहारिक अंतर्दृष्टि और केस-आधारित उदाहरण साझा किए।

स्वागत भाषण में बाल रोग विभाग की अध्यक्ष प्रो. उज्मा फ़िरदौस ने डॉ. काज़मी की शैक्षणिक उपलब्धियों और एएमयू से उनके निरंतर अकादमिक व एलुमनी जुड़ाव को रेखांकित किया। उन्होंने युवा चिकित्सकों के नैदानिक प्रशिक्षण को सुदृढ़ करने में अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग के महत्व पर बल दिया।

इंटरैक्टिव सत्र के दौरान स्नातकोत्तर रेज़िडेंट्स ने सक्रिय चर्चा में भाग लियाजिससे यह व्याख्यान उनके नैदानिक प्रशिक्षण के लिए विशेष रूप से लाभकारी रहा। कार्यक्रम में चिकित्सा संकाय के डीन प्रो. मोहम्मद ख़ालिदप्राचार्य एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अंजुम परवेज़ सहित विभाग के शिक्षक और रेज़िडेंट्स उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शाद अबक़री ने प्रस्तुत किया।

Sunday, January 18, 2026

प्रो. ज़ियाउर रहमान एएमयू कोर्ट के सदस्य नामित

 


Prof. Syed Ziaur Rahman

प्रो. ज़ियाउर रहमान एएमयू कोर्ट के सदस्य नामित

अलीगढ़, 17 जनवरीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के फ़ार्माकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. सैयद ज़ियाउर रहमान को विश्वविद्यालय कोर्ट का सदस्य घोषित किया गया है।

यह नामांकन रोटेशन के आधार पर अगले वरिष्ठतम अध्यक्ष के रूप में उनकी क्षमता में किया गया है। वे तीन वर्षों की अवधि अथवा संबंधित विभाग के अध्यक्ष पद पर बने रहने तकजो भी पहले होविश्वविद्यालय कोर्ट के सदस्य के रूप में कार्य करेंगे।

 

JMI to develop 'Learner's Glossary of Social Sciences' from English to Hindi

 Prof. Mazhar Asif, VC, JMI emphasizes the role of Hindi and Indian languages in decolonizing minds from colonial past; JMI to develop 'Learner's Glossary of Social Sciences' from English to Hindi


प्रो. मज़हर आसिफ़कुलपतिजेएमआई ने औपनिवेशिक अतीत से दिमाग को आज़ाद करने में हिंदी और भारतीय भाषाओं की भूमिका पर ज़ोर दियाजेएमआई- अंग्रेजी से हिंदी में 'सामाजिक विज्ञान की लर्नर्स ग्लोसरीडेवलप करेगा

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग (CSTT) के तत्वावधान में और जामिया मिल्लिया इस्लामिया (केंद्रीय विश्वविद्यालय) के राजनीति विज्ञान विभाग के सहयोग से अंग्रेजी से हिंदी में 'सामाजिक विज्ञान की लर्नर्स ग्लोसरीविकसित करने पर आयोजित पाँच दिवसीय कार्यशाला 14 जनवरी, 2026 को विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के एम.एन. मीनाई सेमिनार कक्ष में एक समापन सत्र के साथ संपन्न हुई।

समापन भाषण जामिया मिल्लिया इस्लामिया के माननीय कुलपतिप्रो. मज़हर आसिफ़ ने दियाजो भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभागदिल्ली मध्य-1 (कार्यालय) की नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष भी हैंऔर जेएमआई और CSTT के बीच सहयोग के मुख्य संरक्षक भी हैं। प्रो. आसिफ ने औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति पाने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा, “आधुनिकता की झूठी भावना का लोगों के दिमाग पर ज़हरीला असर होता है। हमें भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) को प्राथमिकता देकर इसे तुरंत ठीक करने की ज़रूरत है।” उन्होंने राजनीतिक शब्दावली के हिंदी और अन्य आधुनिक भारतीय भाषाओं में अनुवाद के काम की सराहना की और कार्यशाला में उपस्थित सभी लोगों को शुभकामनाएँ दीं।

सामाजिक विज्ञान की शब्दावली के अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद के विषय पर आगे बोलते हुएप्रो. आसिफ़ ने कहा, “केवल वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दों का अनुवाद करना अनुवाद की भावना के साथ न्याय नहीं हो सकता है। शब्दावली का अनुवाद करते समय भूगोलइतिहास और संस्कृति को संदर्भ में रखना होगाचाहे वह आठवीं अनुसूची की भाषाएँ हों या कोई अन्य भाषा।

एक पेशेवर अनुवादक और भारतीय और विदेशी भाषाओं के एक प्रमुख भाषा विशेषज्ञ के रूप में अपने व्यापक अनुभव के साथप्रो. आसिफ़ ने समिति के सदस्यों को सलाह दी कि वे प्रामाणिक अनुवाद की सीमाओं का ध्यान रखेंचाहे वह भारत में बोली और लिखी जाने वाली कोई भी भाषा हो। प्रोफेसर आसिफ़ ने तेरह विशेषज्ञ सदस्यों की टीम द्वारा किए गए काम की सराहना कीजिन्होंने सोशल साइंस में इस्तेमाल होने वाले तकनीकी और वैज्ञानिक शब्दों की शब्दावली को हिंदी में तैयार करने का काम किया है।

स्वागत भाषण कार्यशाला  के कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर नावेद जमाल ने दिया। उन्होंने राष्ट्रीय भाषा की भावना को जगाने में गांधी के हिंदी/ हिंदुस्तानी को बढ़ावा देने के विचार और भारतेंदु हरिश्चंद्र की भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने जाने-माने भौतिक विज्ञानी और शिक्षाविद प्रोफेसर डी.एस. कोठारी की भूमिका और योगदान पर भी प्रकाश डालाजिन्होंने 1960-1965 तक वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली समिति (CSTT) की अध्यक्षता की थी।

राजनीति विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर बुलबुल धर-जेम्स ने दर्शकों को कार्यशाला  के विषय से परिचित कराया। सहायक निदेशक डॉ. शहजाद अहमद अंसारी ने वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग (CSTT) के बारे में संक्षिप्त परिचय दिया। सोशल साइंस के डीनप्रोफेसर मुस्लिम खान ने आमंत्रित विशिष्ट वक्ता के रूप में सभा को संबोधित किया। डॉ. सरोज कुमार दास ने अपने संबोधन में भारतेंदु हरिश्चंद्र के विचार पर फिर से ज़ोर दियाजिसमें उन्होंने निज भाषा उन्नति (अपनी भाषा में विकास) पर प्रकाश डाला था।

कार्यशाला में पूरे भारत से भाग लेने वाले प्रमुख विशेषज्ञों में प्रोफेसर वैष्णा नारंग (जेएनयू); प्रोफेसर राजेंद्र कुमार पांडेप्रिंसिपलदेशबंधु कॉलेज (डीयू); प्रोफेसर प्रवीण कुमार झा (डीयू); प्रोफेसर नावेद जमालजेएमआई; डॉ. सरोज कुमारगवर्नमेंट मीरा गर्ल्स कॉलेजउदयपुर; डॉ. अखशना सिंहअर्थशास्त्र विभागएआरएसडी कॉलेज (डीयू); डॉ. अखलाक अहमदराजनीति विज्ञान विभागए.एस. कॉलेजबिक्रमगंजबिहार; डॉ. रजनी बहादुर सिंहटीजीटीसोशल साइंस केएचएमएस दिल्ली; हिमांशी मैनारीटीजीटी सोशल साइंसकेएचएमएसदिल्ली; अब्दुल कुद्दूस अंसारीपीजीटी अर्थशास्त्रसैयद आबिद हुसैन एस एस स्कूलजेएमआई; डॉ. नीतीश कुमार, (डीयू); सुश्री सोनी कुमारी ठाकुर, (जेएमआई); मंसूर हसन खानटीजीटी, (जेएमआई स्कूल) ने भाग लिया। कार्यक्रम में राजनीति विज्ञान विभाग के सभी फैकल्टी सदस्य तथा डॉ. राजेश कुमारहिंदी अधिकारी उपस्थित थे।

राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन जामिया मिल्लिया इस्लामिया के राजनीति विज्ञान विभाग के फैकल्टी मेंबर डॉ. शशि कांत के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मशहूर शायर मजाज़ लखनवी का एक शेर सुनाकर वाइस-चांसलर के भाषण में महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रेरणादायक संदेश पर ज़ोर दिया। तेरे माथे पे यह आँचल बहुत खूब है लेकिन तू इस आँचल से एक परचम बना लेती तो अच्छा था।

यह ध्यान देने वाली बात है कि CSTT की स्थापना 1 अक्टूबर, 1960 को भारत सरकार (शिक्षा मंत्रालय) के एक प्रस्ताव के ज़रिएराष्ट्रपति के आदेश सेभारत के संविधान के अनुच्छेद 344 के क्लॉज़ (4) के प्रावधानों के तहत गठित समिति की सिफारिशों के अनुसार की गई थी। 1960 के प्रस्ताव के अनुसारकमीशन का काम नई शब्दावली का इस्तेमाल करके स्टैंडर्ड साइंटिफिक टेक्स्टबुक तैयार करना हैजिसे उसने विकसित या मंज़ूर किया हैऔर साइंटिफिक और टेक्निकल डिक्शनरी तैयार करना है। CSTT चार कैटेगरी: मौलिकव्यापकपरिभाषात्मक और लर्नर्स-ओरिएंटेड में शब्दावली तैयार करता है।

 

JMI hosts the prestigious 5th World Cup Zurkhanesh Sports & Koshiti Pahlavani Championship



JMI hosts the prestigious 5th World Cup Zurkhanesh Sports & Koshiti Pahlavani Championship; 130 athletes from across 7 countries take part in the international wrestling event

The Games & Sports Department, Jamia Millia Islamia (JMI), in collaboration with the Zurkhanh Sports & Kushti Federation (India), organized the 5th World Cup Zurkhanesh Sports & Koshiti Pahlavani Championship from the 23rd to the 24th of December, 2025, at the Nawab Mansoor Ali Khan Pataudi Sports Complex, JMI. This prestigious international event witnessed the participation of nearly 130 athletes from  seven  countries, namely, Iran, Iraq, Azerbaijan, Belarus, Uganda, Tanzania, and India.


Mr. Waseem Khan, a student of B.A. (Hons.) Hindi 1st Year and a seasoned wrestling player of JMI, participated in the championship and won a silver medal (80 kg weight category).

 

Further, the following wrestlers of India won medals in the championship:

 

1. Mr. Aniket Sharma – 60 kg Category – Gold Medal
2. Mr. Parshant Kumar – 70 kg Category – Gold Medal
3. Mr. Washim Khan – 80 kg Category – Silver Medal
4. Mr. Sumit Kumar – 90 kg Category – Bronze Medal

In Koshti Pahlavani, the following emerged as rank holders:

1st Iran
2nd India
3rd Azerbaijan

 

In the Overall Championship, the rank order stood as

1st Iran
2nd Iraq
3rd Azerbaijan

 

Prof. Mazhar Asif, Hon'ble Vice-Chancellor, JMI, appreciated the sincere efforts of the organizing committee for their hard work in putting together the globally reputed championship at Jamia Millia Islamia. Prof. Asif congratulated all the medallists and participants from the various nations who travelled all the way to India and JMI to participate in the reputed event and extended his best wishes for their future tournaments.

 

Prof. Md. Mahtab Alam Rizvi, Registrar, JMI, lauded the efforts of the organizers for their excellent execution of the grand international event and sent his best wishes to all the medallists of Zurkhanesh Sports & Koshiti Pahlavani and participants of the championship from all the participating countries.  

 

Prof. Mohd. Mahfuzul Haque, Chairman, Games & Sports Committee, JMI, presented medals to the winners in the 'Closing & Prize Distribution Ceremony' and applauded the performances of the champions. He congratulated the athletes from the seven nations for their participation in this championship and praised all the medallists for their remarkable achievement. Prof. Haque also appreciated the organizing team of the Zurkhanh Sports & Kushti Federation (India) and the Games & Sports Department, JMI, for the successful conduct of the tournament. 

 
Prof. Nafis Ahmad, Hony. Director, Games & Sports, JMI, who also joined the Closing & Prize Distribution Ceremony and awarded medals to the winners of the tournament, expressed sincere gratitude to the university administration for providing all necessary support during the conduct of the 5th World Cup Zurkhanesh Sports & Koshiti Pahlavani Championship at Jamia Millia Islamia. Prof. Nafis admired the efforts of all the competitors from various countries for their participation in the tournament and congratulated all the medallists and winners of the championship. He wished them luck in their future sports endeavors. 

 

 

Friday, January 16, 2026

Participants of workshop on Minimally Invasive Cardiac Care with MIDCAB

 

जेएनएमसीएएमयू के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग द्वारा एमआईडीसीएबी कार्यशाला आयोजित

अलीगढ़, 16 जनवरीः नैदानिक उत्कृष्टता और नवाचार की अपनी सतत यात्रा को आगे बढ़ाते हुएअलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग ने मिनिमली इनवेसिव कोरोनरी आर्टरी बाइपास सर्जरी (एमआईडीसीएबी) पर दो दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला का सफल आयोजन कर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। इस कार्यक्रम ने उन्नत हृदय-चिकित्सा और चिकित्सा शिक्षा के केंद्र के रूप में जेएनएमसीएच की बढ़ती प्रतिष्ठा को पुनः पुष्ट किया।

कार्यशाला में समकालीन न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों पर ध्यान केंद्रित किया गयाजिनका उद्देश्य शल्य आघात को कम करनारोगियों की रिकवरी को तेज करना और समग्र उपचार परिणामों में सुधार करना है। शैक्षणिक गतिविधियों का मुख्य आकर्षण लाइव ऑपरेटिव डेमोंस्ट्रेशन रहेजिससे प्रतिभागियों को इस अत्यंत विशिष्ट प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।

कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि के रूप में गुजरात के भावनगर स्थित एचसीजी हॉस्पिटल के कार्डियक साइंसेज निदेशक डॉ. ब्रजमोहन सिंह उपस्थित रहे। उन्हें कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है और उनके नाम 5,000 से अधिक वयस्क हृदय शल्यक्रियाएँ दर्ज हैं। उनके साथ कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. अजय राठोड़ और फिजिशियन असिस्टेंट नरेंद्र कुमार शर्मा भी रहेजिनकी विशेषज्ञता ने व्यापक पेरिऑपरेटिव और तकनीकी सहयोग सुनिश्चित किया।

कार्यशाला के दौरान दो रोगियों की एमआईडीसीएबी प्रक्रियाएँ सफलतापूर्वक की गईंजिनके नैदानिक परिणाम उत्कृष्ट रहे। लाइव सर्जिकल सत्रों में उत्तर प्रदेश और दिल्ली के विभिन्न स्थानों से आए कार्डियोथोरेसिक सर्जनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का नेतृत्व प्रो. मोहम्मद आजम हसीन ने कियाजिन्होंने अतिथि संकाय के साथ मिलकर शल्यक्रियाएँ कीं। यह विभाग की जटिल न्यूनतम इनवेसिव हृदय प्रक्रियाओं में बढ़ते आत्मविश्वास और दक्षता को दर्शाता है। डॉ. सैयद शमायल रब्बानी ने बताया कि विभाग कई वर्षों से निरंतर सकारात्मक परिणामों के साथ न्यूनतम इनवेसिव हृदय शल्यक्रियाएँ कर रहा है और अब अत्यंत जटिल न्यूनतम इनवेसिव कोरोनरी प्रक्रियाओं तक प्रगति कर चुका हैजिससे जेएनएमसी देश के चुनिंदा सरकारी संस्थानों में शामिल हो गया है जो न्यूनतम इनवेसिव सीएबीजी करने में सक्षम हैं। सहायक प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद आमिर ने न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी के रोगी-केंद्रित लाभोंकम दर्दशीघ्र रिकवरी और बेहतर सौंदर्यात्मक परिणाम पर प्रकाश डाला।

एनेस्थीसिया सेवाओं का कुशल प्रबंधन डॉ. नदीम और डॉ. मनाजिर के नेतृत्व वाली टीम ने कियाजबकि परफ्यूजन सहयोग डॉ. साबिर अली खान और इरशाद कुरैशी द्वारा प्रदान किया गया। शल्य सहायक के रूप में सलमानअसलम और कामरान ने सहयोग दियातथा समर्पित पोस्टऑपरेटिव आईसीयू देखभाल सुहैलरिनूनदीम और कैलाश द्वारा सुनिश्चित की गई।

इस पहल को विश्वविद्यालय नेतृत्व कुलपति प्रो. नाइमा खातूनचिकित्सा संकाय के डीन प्रो. मोहम्मद खालिद और जेएनएमसी के प्राचार्य प्रो. अंजुम परवेज का सशक्त प्रोत्साहन प्राप्त हुआ। उन्होंने विभाग के प्रयासों की सराहना की और रोगी देखभालप्रशिक्षण तथा संस्थागत उत्कृष्टता को सुदृढ़ करने में ऐसे अकादमिक और नैदानिक सहयोगों के महत्व को रेखांकित किया।

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