Wednesday, May 13, 2026

NAMS Uttar Pradesh Cell Inaugurated at JN Medical College, AMU


NAMS Uttar Pradesh Cell Inaugurated at JN Medical College, AMU

ALIGARH, May 12: The National Academy of Medical Sciences (NAMS) Uttar Pradesh State Cell was inaugurated at Jawaharlal Nehru Medical College (JNMC), Aligarh Muslim University by Padma Shri Prof Rajendra Prasad, Chairperson of NAMS India–Uttar Pradesh State Chapter, Dr B. C. Roy Awardee and Director of Medical Education associated with Era’s Medical College and Hospital.

The programme was held in the presence of Dean, Faculty of Medicine, Prof Mohammad Khalid, and Principal and CMS, Prof Anjum Parwez.

Addressing the gathering, Prof Rajendra Prasad highlighted the activities and objectives of NAMS and encouraged faculty members and students to actively participate in its academic and research programmes. He also informed participants about various categories of NAMS membership and urged eligible faculty and students to apply.

Prof Mohammad Khalid appreciated the initiative and reiterated support for activities promoting academic excellence, research and collaborative learning, while Prof Anjum Parwez congratulated the organising team on the establishment of the NAMS cell and encouraged wider participation in NAMS activities.

Among those present were Prof Santosh Kumar, Head, Department of TB and Respiratory Medicine, SN Medical College, Agra; Prof Mohd Shameem, Chairperson, Department of TB and Respiratory Diseases; Prof Saira Mehnaz; Prof Mohd Aslam; Prof Saifullah Khalid; Dr Syed Shariq Naeem; and Dr Mehdi Hayat Shahi.

The programme was conducted by Prof Shah Mohammad Abbas Waseem of the Department of Physiology.

तत्कालीन जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ & राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम

 

पाकिस्तान के तत्कालीन जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ & राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम

से यह किस्सा है साल 2005 का, जब पाकिस्तान के तत्कालीन जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ भारत दौरे पर आए थे। चर्चा ये थी कि जब मुशर्रफ़ राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम से मिलेंगे तो निश्चित रूप से 'कश्मीर' का मुद्दा उछालेंगे।
​मुलाक़ात से ठीक एक दिन पहले, कलाम साहब के सचिव पी.के. नायर साहब थोड़े चिंतित थे। उन्होंने कलाम साहब के पास जाकर धीरे से कहा— "सर, मुशर्रफ़ कल ज़रूर कश्मीर का राग अलापेंगे, आपको इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।"
​अब्दुल कलाम साहब, जिनके चेहरे पर हमेशा एक सौम्य मुस्कान रहती थी, एक क्षण के लिए रुके। उन्होंने नायर साहब की आंखों में देखा और बड़े आत्मविश्वास से कहा— "उसकी चिंता आप मत कीजिए, मैं सब संभाल लूंगा।"
​अगले दिन जो हुआ, वह इतिहास बन गया!
​जैसे ही मुलाक़ात शुरू हुई, डॉ. कलाम ने फ्रंट फुट पर मोर्चा संभाला। उन्होंने किसी राजनीतिक विवाद या सीमा विवाद पर बात करने के बजाय, मुशर्रफ़ को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट 'PURA' (Providing Urban Amenities to Rural Areas) के बारे में बताना शुरू किया।
​अगले 30 मिनट तक कलाम साहब एक राष्ट्रपति की तरह नहीं, बल्कि एक विजनरी वैज्ञानिक और शिक्षक की तरह मुशर्रफ़ को यह समझाते रहे कि कैसे आने वाले 20 सालों में भारत और पाकिस्तान अपने गांवों का विकास करके गरीबी को जड़ से मिटा सकते हैं।
उन्होंने नक्शों और डेटा के जरिए विकास का ऐसा खाका खींचा कि मुशर्रफ़ को कश्मीर शब्द बोलने का मौका ही नहीं मिला।
मुलाक़ात के बाद जब मुशर्रफ़ बाहर निकले, तो उनके तेवर बदले हुए थे। उन्होंने बेहद सम्मान के साथ कहा— "धन्यवाद राष्ट्रपति महोदय! भारत वाकई बहुत किस्मत वाला है कि उसके पास आप जैसा एक महान वैज्ञानिक राष्ट्रपति है।"
​यह थी डॉ. कलाम की ताकत। उन्होंने दिखा दिया कि विवादों को सुलझाने का सबसे बड़ा हथियार 'विकास' और 'शिक्षा' है। आज वो महान शख्सियत हमारे बीच भौतिक रूप से नहीं है, लेकिन उनकी सोच और उनका विजन आज भी करोड़ों भारतीयों के सीने में मशाल बनकर जल रहा है।
​मिसाइल मैन, जनता के राष्ट्रपति और हम सबके मार्गदर्शक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को सादर नमन! 🙏🧡
​अगर आप भी कलाम साहब के विजन से प्रेरित हैं, तो कमेंट में 'जय हिंद' लिखें और इसे शेयर करें! 🇮🇳
ऐसे ही और रोचक जानकारी के लिए पेज को फॉलो करे 🙏

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ALLAH MARHOOM MUKHTAR AHMAD ANSARI KO JANNAT ATA FARMAYE----SALAMEVATAN


 MUKHTAR AHMAD ANSARI

कम लोगों को पता होगा कि बाहुबली मुख्तार अंसारी के दादा थे मुख्तार अहमद अंसारी और 1948 की भारत - पाकिस्तान जंग के हीरो , ' नौशेरा के शेर ' ब्रिगेडियर उस्मान , नाना पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी रिश्ते में चाचा

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डॉ. मुख़्तार अहमद अंसारी नामी , ऊंची शोहरत के चिकित्सक और राष्ट्रवादी मुस्लिम नेता थे जिनकी भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में अविस्मरणीय भूमिका थी वाराणसी में काशी विद्यापीठ और दिल्ली में जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय स्थापित कराने में उनका महत्वपूर्ण योगदान था

डॉ. मुख़्तार अहमद अंसारी का जन्म 25 दिसम्बर 1880 को उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर ज़िले में हुआ उन्होंने मद्रास ( वर्तमान चेन्नई ) और इंग्लैंड में चिकित्सा के क्षेत्र में शिक्षा ग्रहण की उन्होंने ' एडिनबरा विश्वविद्यालय ' से अपनी शिक्षा पूरी की और कई साल तक लंदन के विभिन्न अस्पतालों में काम किया

वह महात्मा गांधी को बहुत प्रिय थे और उनके भरोसे के सिपाही थे 1896 में उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर से हाई स्कूल की पढ़ाई के बाद अंसारी अपने भाइयों के पास हैदराबाद गए और उच्च शिक्षा हासिल की ग्रैजुएशन के बाद मद्रास मेडिकल कॉलेज में उन्हें निज़ाम स्कॉलरशिप से दाखिला मिला क्योंकि वह बहुत मेधावी विद्यार्थी थे एमडी और एमएस की डिग्री में सर्वोच्च स्थान पाने के बाद उन्हें लंदन के लॉक अस्पताल में रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया यह पहली उपलब्धि किसी भारतीय के नाम रही

भारत के शुरूआती सर्जन ज़नाब अंसारी साहब ने इसके बाद लॉक अस्पताल के साथ ही, लंदन के ही चेयरिंग क्रॉस अस्पताल के लिए भी बेहतरीन सेवाएं दीं इसके नतीजे में आज भी चेयिरिंग क्रॉस अस्पताल में उनकी याद में अंसारी वार्ड बना हुआ है

मद्रास में पढ़ाई के दौरान 1898 में पहली बार अंसारी साहब ने आनंद मोहन बोस की अध्यक्षता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में दर्शक के तौर पर हिस्सा लिया था 1927 में जब मद्रास में अगली बार कांग्रेस का अधिवेशन हुआ तब खुद अंसारी साहब उसके अध्यक्ष थे

इन 29 सालों में लंदन में रहते हुए उनका जुड़ाव कांग्रेस के नेताओं से बना रहा इसी जुड़ाव के चलते वह लंदन की सुख - सुविधा की ज़िंदगी छोड़कर भारत आए और मुस्लिम लीग कांग्रेस से जुड़कर राजनीति में सक्रिय हुए लेकिन , उन्होंने यहां भी अपनी मेडिकल प्रैक्टिस लगातार जारी रखी

प्रखर राष्ट्रवादी नेता अंसारी साहब खिलाफत आंदोलन के मुखर समर्थक रहे थे बालकन युद्ध के समय तुर्की सैनिकों के इलाज के लिए मेडिकल मिशन में उनकी प्रमुख भूमिका थी पश्चिमी क्रूरता के विरोध में छह महीनों तक भारतीयों खासकर भारतीय मुस्लिमों ने ओटोमान साम्राज्य के सैनिकों के लिए यह मिशन चलाया था, जिसके तहत चंदे के ज़रिये मिली रकम से दवाएं और मेडिकल उपकरण तुर्की पहुंचाए गए थे

अंसारी साहब धर्म के आधार पर बंटवारे के समर्थक कभी नहीं थे 1920 के दशक में जब मुस्मिल लीग में मोहम्मद अली जिन्ना का प्रभुत्व बढ़ा और बंटवारे की राजनीति को हवा मिलने लगी, तब अंसारी ने महात्मा गांधी के विचारों को तरजीह देते हुए कांग्रेस के साथ अपनी नज़दीकियां और मज़बूत कीं और जिन्ना का विरोध किया

अंसारी जी की कोठी दारुस्सलाम यानी ' शांति का ठिकाना ' पर गांधीजी जब भी दिल्ली आया करते थे, रुकते थे इसके अलावा यह कोठी अरुणा आसफ अली और मनुभाई शाह जैसे क्रांतिकारियों के छुपने का ठिकाना भी हुआ करती थी यहीं अंसारी की मेडिकल प्रैक्टिस चलती थी और यहीं कांग्रेस की बैठकें हुआ करती थीं



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