एएमयू के यूजीसी एमएमटीटीसी में दो शिक्षक विकास कार्यक्रम संपन्न
अलीगढ़, 30 सितंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के यूजीसी मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित दो शिक्षक विकास कार्यक्रमों का समापन सीएएलईएम सभागार में सर्टीफिकेट वितरण के साथ हुआ। इन कार्यक्रमों में देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के 153 शिक्षकों ने भाग लिया।
समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए एएमयू की कुलपति प्रो. नइमा खातून ने कार्यक्रम पूरा करने पर सभी प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में शिक्षक प्रशिक्षण और व्यावसायिक विकास की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षक आजीवन सीखने, नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रमुख आधार हैं।
मुख्य अतिथि राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, अलीगढ़ के कुलसचिव प्रबुद्ध सिंह, पीसीएस ने वर्तमान शैक्षिक चुनौतियों के अनुरूप शिक्षकों और उच्च शिक्षण संस्थानों की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना ऐसे कक्षा कक्षों के माध्यम से साकार होगा, जहां समग्र शिक्षा पर ध्यान दिया जाता है।
एएमयू शिक्षा विभाग की अध्यक्ष प्रो. निखत नसरीन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग से तेजी से प्रभावित हो रहे शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिक्षण, सीखने और शोध में शिक्षक हमेशा महत्वपूर्ण बने रहेंगे। शिक्षक की भूमिका केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को प्रेरित करना भी उसका महत्वपूर्ण दायित्व है।
यूजीसी एमएमटीटीसी की कार्यक्रम निदेशक डॉ. फायजा अब्बासी ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा एएमयू की शैक्षणिक उत्कृष्टता, विविधता और समावेशी परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने केंद्र में प्रतिभागियों को उपलब्ध कराए गए सीखने के अनुकूल वातावरण और आतिथ्य के बारे में भी जानकारी दी।
प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के दौरान अपने अनुभव साझा किए। लोहाघाट, चंपावत के डॉ. किशोर चंद्र जोशी और सिधरवाली की डॉ. पूनम धुल ने रिफ्रेशर कोर्स के अनुभव बताए, जबकि बड़ौत, बागपत की डॉ. अर्चना सिंह और जौनपुर के सौरभ कुमार दुबे ने शिक्षक इंडक्श्ज्ञन कार्यक्रम से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के शैक्षणिक और व्यावहारिक पक्षों की सराहना की। इनमें एएमयू परिसर, मौलाना आजाद पुस्तकालय और संग्रहालय का भ्रमण, मनोरंजन गतिविधियां, व्यायाम सुविधाएं, शाम-ए-गजल, अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू भाषा दक्षता की वैकल्पिक कक्षाएं तथा एएमयू के शिक्षकों के घरों में जाकर सांस्कृतिक संवाद जैसी गतिविधियां शामिल थीं।
प्रतिभागियों ने यह भी बताया कि पाठ्यक्रम के मूल्यांकन के तहत व्यावसायिक शिक्षण वीडियो तैयार करने के लिए डिजिटल शिक्षा स्टूडियो का उपयोग करने का अवसर मिला। आवासीय प्रतिभागियों अमरसिंह कॉलेज, लखावटी, बुलंदशहर के नवीन कुमार और एएमयू के पैरामेडिकल कॉलेज के प्रकाशिकी विभाग की साइमा अहसान को केंद्र के पुस्तकालय का प्रभावी उपयोग करने के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
ऑनलाइन शिक्षक इंडक्शन कार्यक्रम के पाठ्यक्रम समन्वयक प्रो. ए.आर. किदवई ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए। वहीं, शिक्षक शिक्षा के पुनश्चर्या पाठ्यक्रम की पाठ्यक्रम समन्वयक प्रो. नसरीन ने पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए।
कार्यक्रम का संचालन एएमयू के सीईपीईसीएएमआई में अंग्रेजी के सहायक प्रोफेसर डॉ. हारिस बिन मंसूर ने किया और धन्यवाद ज्ञापित किया।
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