Friday, September 11, 2026

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर एएमयू में जागरूकता मार्च


 विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर एएमयू में जागरूकता मार्च

अलीगढ़, 10 सितंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर मनोविज्ञान विभाग ने विद्यार्थी परामर्श केंद्र के सहयोग से आत्महत्या रोकथाम जागरूकता मार्च आयोजित किया। मार्च में विद्यार्थियों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लेकर मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत करने और समय पर सहायता लेने का संदेश दिया।

मार्च से पूर्व मनोविज्ञान विभाग और विद्यार्थी परामर्श केंद्र की ओर से पोस्टर बनाने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यार्थियों ने “आप अकेले नहीं हैं” और “मदद मांगना ठीक है” जैसे संदेश लिखे। इन पोस्टरों के साथ मार्च निकाला गया और “उम्मीद की आवाज बुलंद करें”, “आप महत्वपूर्ण हैं, आपका जीवन महत्वपूर्ण है” तथा “आत्महत्या को ना कहें” जैसे नारे लगाए गए।

कुलपति प्रो. नइमा खातून, सहकुलपति प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान, कुलसचिव प्रो. आसिम जफर, मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाह आलम प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान और छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. मोहम्मद अतहर अंसारी सहित मनोविज्ञान विभाग के शिक्षकों ने विद्यार्थियों के साथ मार्च में भाग लिया।

कुलपति प्रो. नइमा खातून ने मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने आत्महत्या रोकथाम में माता-पिता की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उनसे बच्चों की भावनात्मक जरूरतों के प्रति संवेदनशील और सजग रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि घर का माहौल ऐसा होना चाहिए, जहां युवा अपनी परेशानियां खुलकर बता सकें और जरूरत पड़ने पर मदद मांगने में संकोच न करें। उन्होंने विद्यार्थियों से भी एक-दूसरे का सहयोग करने की अपील की और कहा कि साथी विद्यार्थी एक-दूसरे की भावनाओं और परेशानियों को बेहतर समझते हैं तथा सामाजिक और भावनात्मक सहयोग दे सकते हैं।

इससे पूर्व मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाह आलम ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए आत्महत्या रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भावनात्मक परेशानी के संकेतों को पहचानने, मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत करने और परेशान लोगों को समय पर सहयोग देने की आवश्यकता बताई।

विद्यार्थी परामर्श केंद्र के समन्वयक डॉ. नशीद इम्तियाज के साथ डॉ. हीना परवीन और डॉ. ईशा रहमान ने मार्च के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रो. रूमाना सिद्दीकी, डॉ. रेशमा जमाल, डॉ. सलमा कनीज, डॉ. महविश फातिमा, डॉ. आसिफ हसन, डॉ. आयशा खान और डॉ. मारिया मादिहा ने भी भाग लिया।

प्रो. अजरा मूसवी, उन्नत महिला अध्ययन केंद्र की डॉ. जूही गुप्ता, जनसंपर्क अधिकारी उमर सलीम पीरजादा, अन्य विभागों के वरिष्ठ शिक्षक और एएमयू के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी मार्च में शामिल होकर एकजुटता का संदेश दिया।

मार्च का समापन उम्मीद, साहस और सामूहिक जिम्मेदारी के संदेश के साथ हुआ। इस अवसर पर ऐसे सहयोगी माहौल के निर्माण पर जोर दिया गया, जहां लोग अपनी परेशानियों के बारे में खुलकर बात कर सकें और जरूरत पड़ने पर समय पर सहायता प्राप्त कर सकें।

इस बीच, इंदिरा गांधी हॉल में कल्याण कार्यक्रम श्रृंखला के दूसरे संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। “क्या आप चिंतित हैं? आपकी बातचीत बड़े बदलाव ला सकती है” विषय पर आयोजित इस सत्र में विद्यार्थियों को चिंता और तनाव को समझने, स्वस्थ तरीके से उनसे निपटने तथा भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छी आदतें अपनाने के बारे में जानकारी दी गई।

मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाह आलम और दिल्ली-एनसीआर स्थित क्राइस्ट विश्वविद्यालय की मनोविज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रितु सेखरी ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में भाग लिया। प्रो. शाह आलम ने समय के सही प्रबंधन, उद्देश्यपूर्ण योजना और सोच-समझकर करियर चुनने के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित दिनचर्या और वास्तविक लक्ष्य संतुलित एवं उपयोगी जीवन में मदद करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अत्यधिक मोबाइल और स्क्रीन देखने का समय कम करने, छात्रावास के साथियों से बातचीत करने तथा खेल और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया।

डॉ. रितु सेखरी ने आवासीय छात्रावास में वार्डन के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए सहानुभूति, संवाद, सहयोगपूर्ण संबंधों और छोटे-छोटे सकारात्मक बदलावों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये प्रयास छात्रावास के वातावरण में जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं।

इंदिरा गांधी हॉल की प्रोवोस्ट प्रो. बदर जहां ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति हॉल की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने हाल ही में गठित ‘वेल बीइंग क्लब’ की भूमिका के बारे में बताया, जो स्वस्थ संबंधों, आत्म-जागरूकता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है।

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