एएमयू में इस्लामी विरासत विषय पर एक्स्ट्रा-म्यूरल व्याख्यान आयोजित
अलीगढ़, 12 फरवरीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इस्लामिक स्टडीज विभाग द्वारा “विरासत और इस्लामः एक गणितीय दृष्टिकोण” विषय पर एक्स्ट्रा-म्यूरल व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में इस्लामी विरासत कानून की तार्किक और सुव्यवस्थित व्यवस्था पर प्रकाश डाला गया।
सत्र की अध्यक्षता करते हुए मुफ्ती मुहम्मद जाहिद अली खान ने कहा कि इस्लामी विरासत प्रणाली एक संतुलित और ईश्वरीय मार्गदर्शन पर आधारित व्यवस्था है, जो न्याय और सामाजिक संतुलन सुनिश्चित करती है। कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. जियाउद्दीन फलाही ने कहा कि बढ़ते हुए विरासत संबंधी विवादों के बीच यह विषय आज के समय में बेहद प्रासंगिक है।
मुख्य अतिथि डॉ. रजी-उल-इस्लाम नदवी ने कुरआन और हदीस की रोशनी में मुस्लिम महिलाओं के विरासत में हिस्से पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम में बेटियों, पत्नियों और माताओं को निर्धारित और सुरक्षित हिस्सा दिया गया है तथा विरासत कानून में लैंगिक अन्याय संबंधी भ्रांतियों को खारिज किया।
मुख्य व्याख्यान इस्लामिक इनहेरिटेंस रिसर्च सेंटर, नई दिल्ली के निदेशक इंजीनियर अनवर आलम ने प्रस्तुत किया। उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों और संख्यात्मक विवरण के माध्यम से विरासत के बंटवारे की वैज्ञानिक और गणितीय आधारशिला को समझाया। साथ ही उन्होंने ‘हिबा’ (उपहार) और ‘वसीयत’ की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कुरआन में निर्धारित हिस्सों में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
इस अवसर पर इंजीनियर अनवर आलम की पुस्तक “इंनहेरीटेंस शेयर आॅफ मुस्लिम वूमेन” का विमोचन प्रो. जियाउद्दीन फलाही, विभागाध्यक्ष प्रो. आदम मलिक खान, डॉ. रजी-उल-इस्लाम नदवी, मुफ्ती जाहिद अली खान और लेखक द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
धन्यवाद ज्ञापन में प्रो. आदम मलिक खान ने कहा कि विरासत कानून की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाना जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है। कार्यक्रम का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें शिक्षकगण और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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