Dr. Faruk G. Patel felicitated by Prof Athar Ansari
Rear Admiral S. M. Urooj Athar felicitated by Prof M Mohsin Khan
केपी समूह के अध्यक्ष डॉ. फारूक जी. पटेल ने एएमयू में पांच करोड़ रुपये के सहयोग से केपी उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की
अलीगढ़, 17 अक्टूबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने अपने संस्थापक सर सैयद अहमद खान की 209वीं जयंती मनाई। इस अवसर पर आयोजित स्मृति सभा में न्यायपालिका, रक्षा, शिक्षा और उद्योग जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों, पूर्व विद्यार्थियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने सर सैयद की शैक्षिक सोच और वर्तमान भारत में उसकी प्रासंगिकता पर विचार साझा किए।
गुलिस्ताने सैयद में आयोजित समारोह की अध्यक्षता एएमयू की कुलपति प्रो. नइमा खातून ने की। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह मुख्य अतिथि थे। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह और केरल के एझिमाला स्थित भारतीय नौसेना अकादमी के प्रिन्सिपल रियर एडमिरल एस.एम. उरूज अतहर विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। गुजरात के केपी समूह के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. फारूक जी. पटेल विशेष अतिथि थे।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने सर सैयद के संघर्ष और दृढ़ संकल्प की तुलना आज के युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों से करते हुए विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें केवल सफलता हासिल करना ही नहीं, बल्कि असफलताओं का सामना करना भी सीखना चाहिए। उन्होंने सर सैयद के शैक्षिक आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने विरोध को अवसर में बदला। साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ सामना करने पर असफलताएं भी उपलब्धि की सीढ़ियां बन सकती हैं।
न्यायमूर्ति मसीह ने पढ़ने, वैज्ञानिक खोज, तर्कशीलता और खुले विचारों के प्रति सर सैयद की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि जो समुदाय पढ़ता और सोचता नहीं, वह प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने विद्यार्थियों को डिजिटल सामग्री पर सतही निर्भरता के बजाय गंभीरता से पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पुस्तकें ज्ञान बढ़ाती हैं, अभिव्यक्ति को बेहतर बनाती हैं और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करती हैं।
उन्होंने सर सैयद की सांप्रदायिक सद्भाव की सोच का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका विश्वास था कि हिंदू और मुसलमानों का भविष्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। एएमयू का विविधतापूर्ण परिसर इस सोच का जीवंत उदाहरण है, जहां अलग-अलग क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के लोग साथ पढ़ते, सीखते और आगे बढ़ते हैं।
एएमयू से अपने जुड़ाव को याद करते हुए न्यायमूर्ति मसीह ने कहा कि विश्वविद्यालय ने उन्हें कक्षा से बाहर भी सम्मान, संवाद, मित्रता और जिम्मेदारी के महत्वपूर्ण सबक सिखाए। उन्होंने विश्वविद्यालय की पहली महिला कुलपति प्रो. नइमा खातून की सर सैयद की सोच को उद्देश्य और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाने के लिए सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों से व्यक्तिगत उपलब्धियों से आगे सोचने और आने वाली पीढ़ियों के लिए अवसरों का निर्माण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यही सर सैयद को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह ने अलीगढ़ और मौलाना आजाद पुस्तकालय से अपने गहरे जुड़ाव को याद किया। उन्होंने बताया कि यद्यपि उन्होंने डी.एस. कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की थी, लेकिन अपने करियर की तैयारी के लिए एएमयू के पुस्तकालय में लंबे समय तक अध्ययन किया। पुस्तकालय का स्वागतपूर्ण वातावरण, कर्मचारियों का सहयोग और विद्यार्थियों के बीच भाईचारे की भावना उनके मन पर अमिट छाप छोड़ गई। उन्होंने एएमयू को ऐसा संस्थान बताया जहां ज्ञान जाति, धर्म और आर्थिक पृष्ठभूमि की बाधाओं से ऊपर उठता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विश्वविद्यालय में समावेशिता की यह भावना आगे भी बनी रहेगी।
सर सैयद द्वारा अनुवाद के माध्यम से वैज्ञानिक और ऐतिहासिक ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने के प्रयासों की तुलना न्यायिक निर्णयों को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की वर्तमान पहलों से करते हुए न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि ज्ञान और न्याय का वास्तविक महत्व तभी है, जब वे उन लोगों तक पहुंचें जिनके लिए वे हैं। उन्होंने शिक्षा को गरीब और वंचित पृष्ठभूमि के युवाओं को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने महिला शिक्षा, वास्तविक समानता और संवैधानिक न्याय के महत्व पर जोर देते हुए एएमयू से वंचित वर्गों के विद्यार्थियों के लिए अवसरों का विस्तार जारी रखने का आग्रह किया।
विशिष्ट अतिथि रियर एडमिरल एस.एम. उरूज अतहर ने एएमयू को केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि सर सैयद के उस मिशन का प्रतीक बताया जिसका उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से आत्मविश्वास, चरित्र और बौद्धिक क्षमता का पुनर्निर्माण करना था। वर्ष 1857 के बाद की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सर सैयद ने निराशा के दौर में दोषारोपण करने के बजाय समाज के पुनर्निर्माण के उपायों पर विचार किया। शिक्षा वह माध्यम बनी, जिसके जरिए लोग अपना आत्मविश्वास वापस प्राप्त कर सके और अपने भविष्य के निर्माण में भागीदारी कर सके।
रियर एडमिरल अतहर ने अलीगढ़ को एक वास्तविक विश्वविद्यालय नगर के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा, जहां एएमयू की शैक्षिक विशेषज्ञता क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में प्रत्यक्ष योगदान दे सके। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिक किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने में मदद कर सकते हैं, प्रबंधन विशेषज्ञ पारंपरिक उद्योगों और छोटे व्यवसायों को सहयोग दे सकते हैं, चिकित्सा विशेषज्ञ आसपास के समुदायों तक निवारक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा सकते हैं तथा इंजीनियर नवीकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में योगदान कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि शोध का मूल्यांकन केवल प्रकाशनों के आधार पर नहीं, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि उससे कौन-सी समस्याएं हल हुईं और लोगों के जीवन में कितना सुधार आया। उन्होंने शिक्षकों से शोध सहयोग, उद्योग जगत के साथ साझेदारी और जनसहभागिता मजबूत करने का आह्वान किया। विद्यार्थियों से जिज्ञासु बने रहने, स्थापित धारणाओं पर सवाल उठाने और अपनी शिक्षा का उपयोग समाज की सेवा में करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि सर सैयद को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि ज्ञान को सेवा, शिक्षा को चरित्र और विशेषाधिकार को जिम्मेदारी में बदलना है।
विशेष अतिथि डॉ. फारूक जी. पटेल ने बताया कि वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एएमयू को “मिनी इंडिया” कहे जाने के बारे में सुनने के बाद वह विश्वविद्यालय आने के लिए प्रेरित हुए थे। सर सैयद की दूरदृष्टि को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि उनके द्वारा स्थापित शैक्षिक विरासत आज भी पीढ़ियों को लाभ पहुंचा रही है और भविष्य में भी प्रासंगिक बनी रहेगी।
अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए डॉ. पटेल ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1994 में अपना व्यवसाय शुरू किया था। उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा इस बात का उदाहरण है कि निरंतर प्रयास और दृढ़ संकल्प से परिस्थितियों को बदला जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से उपलब्ध शैक्षिक अवसरों का पूरा लाभ उठाने और अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए मेहनत करने का आग्रह किया।
नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में लगभग दो दशकों से सक्रिय केपी समूह के अध्यक्ष डॉ. पटेल ने एएमयू के साथ सौर एवं पवन ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों से जुड़ा अनुभव साझा करने की इच्छा जताई। उन्होंने विश्वविद्यालय में केपी उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की और बताया कि एएमयू के लिए लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत वाली प्रयोगशाला की योजना भी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वविद्यालय के विकास में योगदान देने और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने में सहयोग करने में खुशी होगी।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. नईमा खातून ने सर सैयद को परिवर्तनकारी विचारक बताते हुए कहा कि उनकी प्रासंगिकता विश्वविद्यालय के संस्थापक होने की भूमिका से कहीं अधिक व्यापक है। उनका स्थायी योगदान एक समुदाय को इतिहास का मूक दर्शक बने रहने के बजाय उसके निर्माण में सक्रिय भागीदार बनने के लिए सक्षम बनाना था। उन्होंने एएमयू समुदाय से बौद्धिक खुलेपन, वैज्ञानिक सोच और नैतिक जिम्मेदारी को साथ लेकर सर सैयद की विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
शिक्षा के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए प्रो. खातून ने स्वतंत्र चिंतन और विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता को सुरक्षित रखते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्रियां हासिल करना और जानकारी जुटाना नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके माध्यम से आलोचनात्मक चिंतन, व्यावहारिक कौशल, चरित्र और समाज में सार्थक योगदान देने की क्षमता विकसित होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को प्रमाणों का आकलन करने, स्थापित धारणाओं पर सवाल उठाने और अपनी कल्पनाशक्ति की सीमाओं को तलाशने के लिए प्रेरित करने की अपील की।
कुलपति ने एएमयू की शैक्षणिक प्रतिष्ठा और शोध उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त करते हुए टाइम्स हायर एजुकेशन की विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग में विश्वविद्यालय के विश्व के शीर्ष 800 विश्वविद्यालयों में शामिल होने, यूएस न्यूज एंड वर्ल्ड रिपोर्ट की रैंकिंग में भारतीय विश्वविद्यालयों के बीच पांचवां स्थान प्राप्त करने, राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढांचे में उसकी स्थिति और ए-प्लस मान्यता का उल्लेख किया। उन्होंने एएमयू के 46 वैज्ञानिकों को विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत शोधकर्ताओं में स्थान मिलने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं, नवाचार, ऑनलाइन शिक्षा और संस्थागत मार्गदर्शन के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के योगदान को भी रेखांकित किया।
प्रो. खातून ने कहा कि ये उपलब्धियां शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और पूर्व विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं। साथ ही, इन उपलब्धियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी सभी पर है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, बौद्धिक स्वतंत्रता और विनम्रता बनाए रखने तथा आगामी छात्रसंघ चुनावों में जिम्मेदारी से भाग लेने का आग्रह किया। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को सामाजिक माध्यमों से परे सार्थक जीवन बनाने और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
पूर्व विद्यार्थियों से अपने शिक्षण संस्थान के सक्रिय प्रतिनिधि बनने की अपील करते हुए उन्होंने उनसे विद्यार्थियों को व्यापक अवसरों से जोड़ने और विश्वविद्यालय के निरंतर विकास में योगदान देने का आग्रह किया। मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की 150वीं वर्षगांठ निकट आने का उल्लेख करते हुए प्रो. खातून ने कहा कि एएमयू का भविष्य केवल उसके इतिहास से तय नहीं होगा, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि उसके विद्यार्थी कौन-से प्रश्न उठाते हैं, किस प्रकार का ज्ञान सृजित करते हैं, कैसा चरित्र प्रदर्शित करते हैं और समाज की कितनी सेवा करते हैं।
समारोह में विद्यार्थियों आयशा जमाल और अबू दाऊद तथा शिक्षकों प्रो. अजरा मूसवी और प्रो. मोहम्मद अली जौहर ने भी संबोधन दिया। उन्होंने सर सैयद की विरासत और उनके शैक्षिक मिशन की वर्तमान प्रासंगिकता पर विचार साझा किए। जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय में इस्लामी अध्ययन के प्रोफेसर प्रो. हुसैन नस्र और कर्नाटक के गुलबर्गा स्थित ख्वाजा एजुकेशन सोसायटी की ओर से प्रो. एम.ए. खान ने भी सभा को संबोधित किया।
सर सैयद अंतर्राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय, अमेरिका में इस्लामी अध्ययन के प्रोफेसर प्रो. हुसैन नस्र को प्रदान किया गया, जबकि राष्ट्रीय सर सैयद उत्कृष्टता पुरस्कार कर्नाटक के गुलबर्गा स्थित ख्वाजा एजुकेशनल सोसायटी को उनके योगदान के लिए दिया गया।
अखिल भारतीय सर सैयद निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं को अंग्रेजी, उर्दू और हिंदी श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए। अंग्रेजी श्रेणी में एएमयू की मलीहा इकबाल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर विमेन की अपूर्वा दत्ता दूसरे और इलाहाबाद विश्वविद्यालय की राजश्री मिश्रा तीसरे स्थान पर रहीं।
हिंदी श्रेणी में एएमयू के वीमेन्स कालिज की सलवा फातिमा प्रथम स्थान पर रहीं। जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के मुशर्रफ परवेज ने दूसरा और एएमयू के वीमेन्स पॉलिटेक्निक की सुभाना रिहान ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
उर्दू श्रेणी में मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद के मोहम्मद फैजुर रजा प्रथम स्थान पर रहे। एएमयू में उर्दू के पीएचडी शोधार्थी मुनव्वर अली दूसरे और उर्दू के ही पीएचडी शोधार्थी सबी जी तीसरे स्थान पर रहे। प्रतियोगिता का विषय “इक्कीसवीं सदी में प्रौद्योगिकी और नैतिकता: सर सैयद का दृष्टिकोण” था।
इससे पूर्व कुलसचिव प्रो. आसिम जफर ने स्वागत भाषण दिया, जबकि छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एम. अतहर अंसारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शारिक अकील और डॉ. फायजा अब्बासी ने किया।
दिनभर के कार्यक्रमों की शुरुआत सुबह छह बजे विश्वविद्यालय की मस्जिद में कुरानख्वानी से हुई। इसके बाद सर सैयद अहमद खान के मकबरे पर चादरपोशी की गई। सुबह साढ़े नौ बजे सर सैयद हाउस में उनके लेखन और पुस्तकों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। इसके साथ पुस्तक विमोचन समारोह भी आयोजित हुआ, जिसके बाद गुलिस्ताने सैयद में स्मृति सभा शुरू हुई।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. नइमा खातून, सहकुलपति प्रो. एम. मोहसिन खान और कुलसचिव प्रो. आसिम जफर की उपस्थिति में सर सैयद अकादमी की दस पुस्तकों का विमोचन किया। इनमें सर सैयद्स तफसीर-उल-कुरान के दो खंड, डॉ. असद फैसल फारूकी की सर सैयद की मुतालाती सवानेह, प्रो. अरशद मसूद हाशमी की अलीगढ़ कॉलेज और शीराज, प्रो. सारिका वाष्र्णेय की सर सैयद अहमद खान - चरितमय तहजीब-उल-अखलाक और फिक्र-ओ-नजर के विशेषांकय आतिफ सैयद की अलीगढ़: द सिटी दैट आउटलास्टेड एम्पायर्स, डॉ. शम्स बदायूनी द्वारा संपादित मुतालए हयात-ए-जावेद के एक सौ पच्चीस साल, मजहर सईद की सर सैयद की कहानी, अशआर की जुबानी, डॉ. एम. फिरोज खान और डॉ. शगुफ्ता नियाज द्वारा संपादित सर सैयद अहमद खान, तथा डॉ. राहत अबरार द्वारा संपादित सर सैयद: रवादारी और अमन के अलमबरदार शामिल हैं।
ये पुस्तकें सर सैयद अहमद खान के जीवन, विचारों, साहित्यिक विरासत और शिक्षा तथा समाज के प्रति उनके स्थायी योगदान के विभिन्न पहलुओं को सामने लाती हैं।
कार्यक्रम का समापन विश्वविद्यालय तराने और राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय समुदाय ने शिक्षा, तर्कशीलता, सामाजिक प्रगति और मानवता की सेवा के सर सैयद के आदर्शों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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