Dr Pervez Alam with his team at patient at AMU Perform First Minimally Invasive Boari Flap Repair for Complex Ureteric Injury
एएमयू के जेएनएमसी में जटिल मूत्रवाहिनी आघात का पहला मिनिमली इनवेसिव बोआरी फ्लैप ऑपरेशन सफल
अलीगढ़, 15 मईः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने जनन-मूत्र संबंधी तपेदिक (जेनिटोयूरिनरी ट्यूबरकुलोसिस) से जुड़ी गंभीर निचली यूरेटर आघात से पीड़ित 26 वर्षीय महिला का दुर्लभ मिनिमली इनवेसिव रिकंस्ट्रक्टिव ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।रोगी को मूत्र क्रिया को प्रभावित करने वाली जटिल डिस्टल यूरेटर चोट के साथ भर्ती कराया गया था। विस्तृत जांच के बाद चिकित्सकों ने जनन-मूत्र संबंधी तपेदिक की भी पुष्टि की, जिससे मामला और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया।
ऑपरेशन से पहले मेडिकल चिकित्सकों की टीम ने रोगी को एंटी-ट्यूबरकुलर उपचार दिया तथा गुर्दे से मूत्र निकासी को सुचारु बनाए रखने के लिए परक्यूटेनियस नेफ्रोस्टॉमी ट्यूब लगाई। लगभग दो महीने के उपचार के बाद रोगी का सफल ऑपरेशन किया गया।
यह शल्य प्रक्रिया सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अतिया जका उर रब के मार्गदर्शन में डॉ. परवेज आलम के नेतृत्व वाली टीम द्वारा की गई। चिकित्सकों ने मिनिमली इनवेसिव बोआरी फ्लैप रिपेयर के साथ श्वार्ज हिच तकनीक का उपयोग करते हुए मूत्राशय के फ्लैप से क्षतिग्रस्त डिस्टल यूरेटर के लगभग 10 से 12 सेंटीमीटर हिस्से का पुनर्निर्माण किया। डा. आलम ने बताया कि यूरीटर वह पतली नली होती है जो किडनी से पेशाब का ेमूत्राशय तक पहुंचाती है और जब किसी आपरेशन, दुर्घना, संक्रमण या अन्य कारण से इस नली में कट, छेद या नुकसान हो जाए तो यूरेटिक आघात कहते हैं।
डॉ. परवेज आलम ने बताया कि यह जेएनएमसी में किया गया पहला मिनिमली इनवेसिव बोआरी फ्लैप रिकंस्ट्रक्शन ऑपरेशन है, जो संस्थान में मिनिमली इनवेसिव यूरोलॉजिकल रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
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