Prof Mohammad Khalid felicitated by Prof Naiyer Asif Prof K. S. Zafar and Prof Hamid Ashraf during the National CME on Obesity at at JN Medical College, AMU ALIGARH
अलीगढ़, 11 मईः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मेडिसिन विभाग एवं राजीव गांधी सेंटर फॉर डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी, मेडिसिन संकाय द्वारा “डिकोडिंग ओबेसिटीः फ्रॉम पैथोफिजियोलॉजी टू मॉडर्न थेराप्यूटिक्स” विषय पर राष्ट्रीय सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन मेडिसिन संकाय सभागार में किया गया।
कार्यक्रम में देशभर के चिकित्सा विशेषज्ञों और स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लेते हुए मोटापे को एक दीर्घकालिक मेटाबॉलिक बीमारी के रूप में बहु-विषयक प्रबंधन की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मेडिसिन संकाय के डीन प्रो. मोहम्मद खालिद ने मोटापे को जटिल बीमारी बताते हुए कहा कि इसके गंभीर मेटाबॉलिक और मनोसामाजिक प्रभाव होते हैं तथा इसके लिए व्यापक और व्यक्तिगत उपचार रणनीतियों की आवश्यकता है।
जेएन मेडिकल कॉलेज के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रो. नैय्यर आसिफ ने कहा कि मोटापा हृदय रोगों और एंडोक्राइन विकारों से जुड़ी एक बड़ी चिकित्सीय चुनौती बनकर उभरा है। उन्होंने आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी चिकित्सकों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
वैज्ञानिक सत्रों के दौरान प्रो. जमाल अहमद ने मोटापे की पैथोफिजियोलॉजी और टाइप-2 डायबिटीज सहित अन्य मेटाबॉलिक विकारों से उसके संबंध पर चर्चा की। डॉ. खुशबू अग्रवाल ने बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) से आगे बढ़कर मोटापे के मूल्यांकन की आधुनिक विधियों पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. सैयद मोहम्मद रजी ने वैज्ञानिक आधार पर पोषण और जीवनशैली प्रबंधन के महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. मोहम्मद आसिम सिद्दीकी ने मोटापे के औषधीय उपचार में हाल के विकास, विशेषकर जीएलपी-1 और इंक्रीटिन आधारित उपचार पद्धतियों तथा उनके मेटाबॉलिक सुधार में योगदान पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का आयोजन आयोजन अध्यक्ष मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. के. एस. जफर और आयोजन सचिव राजीव गांधी सेंटर फार डायबिटीज के प्रो. हामिद अशरफ के नेतृत्व में किया गया। इसमें डॉ. अहमद आलम, डॉ. सैफ कैसर और डॉ. एम. उवैस अशरफ ने भी सहयोग प्रदान किया।
सीएमई कार्यक्रम में 150 से अधिक स्नातकोत्तर छात्रों, चिकित्सकों और डायटीशियनों ने भाग लिया।
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