Prof M Mohsin Khan Prof Siraj Ajmali, Prof M Mohsin khan Prof M Rizwan Khan, Prof Ahmad Mahfooz, Prof Zubair Shadab and others During the Independence Day Mushaira at University polytechnic
अलीगढ़, 17 अगस्तः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग की ओर से आयोजित पारंपरिक स्वतंत्रता दिवस मुशायरा पॉलिटेक्निक के असेंबली हॉल में आयोजित किया गया। इस साहित्यिक संध्या में देश और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर शायरों ने अपनी भावपूर्ण और प्रभावशाली रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वतंत्रता दिवस की भावना के अनुरूप मुशायरे में देशप्रेम, आजादी, सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी शायरी ने विशेष प्रभाव छोड़ा।
मुशायरे की अध्यक्षता सहकुलपति प्रो. मोहसिन खान ने की। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए इस साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में साहित्यिक रुचि विकसित करने और विश्वविद्यालय की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने एएमयू में मुशायरे की समृद्ध और लंबे समय से चली आ रही परंपरा का उल्लेख करते हुए पूर्व में आयोजित कुछ मुशायरों को याद किया। उन्होंने कहा कि मुशायरा एक महत्वपूर्ण साहित्यिक मंच है, जहां उभरते हुए युवा शायरों को आत्मविश्वास हासिल करने, अपनी काव्य अभिव्यक्ति को निखारने और वरिष्ठ शायरों तथा साहित्यकारों से प्रोत्साहन प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
कला संकाय के डीन प्रो. मोहम्मद रिजवान खान ने अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुशायरे की परंपरा और इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल शायरों और शायरी प्रेमियों का जमावड़ा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के शायरों के लिए साहित्यिक प्रशिक्षण का मंच भी है। उन्होंने कहा कि इस मंच पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थी भविष्य में उर्दू शायरी की दुनिया में महत्वपूर्ण स्थान बना सकते हैं। उन्होंने इस साहित्यिक संध्या के आयोजन के लिए उर्दू विभाग, विशेष रूप से विभागाध्यक्ष प्रो. सैयद सिराजुद्दीन अजमली को बधाई दी।
मुख्य अतिथि जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के उर्दू विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अहमद महफूज के अलावा प्रो. सैयद सिराजुद्दीन अजमली, डॉ. एम. आर. कासमी अलीग, डॉ. अदनान काशिफ, अमीर इमाम और मुशायरे के संचालक उर्दू शिक्षकों के व्यावसायिक विकास केंद्र के निदेशक प्रो. जुबैर शादाब सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए और स्थानीय शायरों ने अपनी प्रभावशाली रचनाएं प्रस्तुत कीं।
इस अवसर पर उर्दू विभाग के शिक्षक, विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी मौजूद रहे और शायरों की रचनाओं का आनंद लिया।
इससे पूर्व प्रो. सैयद सिराजुद्दीन अजमली ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और मुशायरे की समृद्ध परंपरा तथा वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस को एक खूबसूरत सुबह बताते हुए कहा कि हमें आजादी के महत्व को हमेशा याद रखना चाहिए, जो लंबे संघर्ष, बलिदान और दृढ़ संकल्प के बाद हासिल हुई है। उन्होंने कुलपति प्रो. नइमा खातून का संदेश भी पढ़कर सुनाया।
उन्होंने यह भी कहा कि देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम उर्दू शायरी की परंपरा में हमेशा से महत्वपूर्ण स्थान रखते रहे हैं। स्वतंत्रता संग्राम के दौर की शायरी से लेकर आज के समय में राष्ट्रीय गौरव और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी कविताओं तक, उर्दू शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों में एकता और सामूहिक भावना जगाने, स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वालों के बलिदान को सम्मान देने तथा आने वाली पीढ़ियों को देश की प्रगति और एकता में योगदान देने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि मुशायरा इस साहित्यिक और देशभक्ति की परंपरा को जीवित रखने के साथ-साथ युवा शायरों को अपने विचारों और आकांक्षाओं को अपनी विशिष्ट शैली में व्यक्त करने का सार्थक मंच भी प्रदान करता है।
मुशायरे का संचालन प्रो. जुबैर शादाब ने साहित्यिक गरिमा के साथ किया। शाम की महफिल में आजादी, सामाजिक वास्तविकताओं, बदलते समय, मानव जीवन के रहस्यों, प्रेम, विरह और अकेलेपन जैसे विषयों पर शायरों की रचनाओं ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
मुशायरे में अहमद महफूज, डॉ. अदनान काशिफ, गजनफर, महताब हैदर, सिराज अजमली, आलम खुर्शीद, डॉ. एम. आर. कासमी अलीग, शाहबुद्दीन साकिब, प्रो. अशहर कदीर, अमीर इमाम, आरिफ हसन खान, सरवर साजिद, सरफराज खालिद, अरीब उस्मानी, आली सबूर, अरमान, सफर नकवी, साईं अलीग, फरहीन शकील सहर और सद्दाम हुसैन मुजमर सहित अनेक शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
No comments:
Post a Comment