Monday, September 14, 2026

AMU Inaugurates Hindi Fortnight Celebrations on Hindi Day

 


Prof Niama Khatoon addressing the inaugural fiction of Hindi Fortnight function at Department of Hindi, on dais Prof VR Jagannathan, Prof Mohd Rizwan Khan, Prof Meraj Ahmad and Prof Shambhunath Tiwari

AMU Inaugurates Hindi Fortnight Celebrations on Hindi Day

राजभाषा (हिन्दी) कार्यान्वयन समिति एवं हिन्दी विभाग के संयुक्त सहयोग                                                                                                          से हिंदी पखवाड़ा समारोह का आयोजन

अलीगढ़, 14 सितंबरः राजभाषा (हिंदी) कार्यान्वयन समिति, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ और हिंदी विभाग के संयुक्त सहयोग से आर्टस फैकल्टी लाउंज में हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी पखवाड़ा समारोह (14 सितंबर से 26 सितंबर) के उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. नइमा खातून ने हिंदी भाषा के महत्व और प्रयोग पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि हिंदी भारत की सबसे बड़ी संपर्क भाषा है।

उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस केवल एक रस्मी आयोजन नहीं है, बल्कि अपनी परंपरा और संस्कृति को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। कुलपति ने कहा कि संवाद करते समय अपनी मातृभाषा के प्रयोग में किसी भी प्रकार का संकोच और हीन भावना का शिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि हिंदी ज्ञान-विज्ञान और नवाचार की भाषा के रूप में निरंतर विकसित हो रही है। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है।

उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात भाषाविद प्रो. वी. आर. जगन्नाथन ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिंदी भारत की विभिन्न भाषाई विविधताओं के बावजूद एक सुदृढ़ भारतीय अस्मिता का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने कहा कि भारत में हमारी वास्तविक चुनौती अंग्रेजी से वैश्विक स्तर पर नहीं, बल्कि भारतीय कार्यक्षेत्र में अपनी भाषा को उसका यथोचित स्थान दिलाने की है। उन्होंने रेखांकित किया कि राजभाषा का अर्थ केवल औपचारिक पत्राचार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे ज्ञान-विज्ञान, उच्च तकनीक और शासन के प्रत्येक मंत्रालय की मुख्य कार्य-भाषा बनना होगा। प्रो. जगन्नाथन ने बल देकर कहा कि देश में भाषा योजना, राजनीतिक स्वार्थों से परे होनी चाहिए। इसमें भाषाविदों, शिक्षाविदों और साहित्यकारों की केंद्रीय भूमिका हो।

विशिष्ट अतिथि कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो रिजवान खान ने दैनिक काम-काज और तकनीक में राजभाषा की स्थिति पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल माध्यमों में हिंदी के प्रयोग को और अधिक अद्यतन करने की है। उन्होंने आह्वान किया कि भाषा के स्तर पर औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होकर ही हम हिंदी को उसका वास्तविक गौरव दिला सकते हैं। उन्होंने हिंदी को युवाओं की अभिव्यक्ति की भाषा बनाने के कई तरीकों पर प्रकाश डाला।

राजभाषा (हिंदी) कार्यान्वयन समिति के सचिव एवं हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो० मेराज अहमद ने कहा कि पहले हिंदी दिवस का आयोजन हिंदी सप्ताह के रूप में किया जाता था किंतु इस वर्ष विश्वविद्यालय के सहयोग से इसे हिंदी पखवाड़े का स्वरूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस का आयोजन केवल औपचारिकता नहीं है। बल्कि यह हमारी भाषा, संस्कृति और परंपरा से जुड़ने का अवसर है। उन्होंने हिंदी को अपनी आत्मा की भाषा कहा।

उद्घाटन समारोह के विशेष आमंत्रित अतिथि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक प्रो. मुजीब उल्लाह जुबेरी थे।

उद्घाटन समारोह में जापान के ओसाका विश्वविद्यालय में हिंदी भाषा एवं साहित्य में स्नातकोत्तर की छात्रा हाना नोहारा ने हिंदी के प्रति अपना लगाव और हिंदी सीखने के अनुभव साझा किये। जापानी छात्रा ने कहा कि जापान में भी हिंदी के प्रति विद्यार्थियों की रुचि बढ़ रही है। और ओसाका विश्व विद्यालय में प्रत्येक वर्ष हिंदी दिवस मनाया जाता है। जापानी छात्रा के अनुसार भारत से हजारों किलोमीटर दूर जापान में हिंदी दिवस का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि हिंदी की पहुंच और प्रभाव आज वैश्विक स्तर पर है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिंदी विभाग के प्रोफेसर कार्यक्रम के समन्वयक शंभुनाथ तिवारी ने कहा कि जिस प्रकार से सभी भाषाएं वन्दनीय होती हैं किंतु फिर भी अपनी भाषा विशेष रूप से पूजनीय होती है। आज हिंदी दिवस पर हिंदी पखवाडे के रूप में हम अपनी मातृभाषा को याद कर रहे हैं। हिंदी का स्वरूप आज वैश्विक हो चुका है। यह हमारा एक राष्ट्रीय पर्व है।

विश्वविद्यालय के हिंदी अधिकारी तथा हिंदी पखवाड़ा के संयोजक असदुल्लाह खान ने कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत कराया तथा माननीय शिक्षा मंत्री  प्रह्लाद जोशी जी के द्वारा प्रेषित हिंदी दिवस सन्देश का सभागार में वाचन किया। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग के प्रो मोहम्मद आशिक अली ने दिया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय तथा शहर के शिक्षक, विद्वान, कर्मचारी तथा विद्यार्थी भारी संख्या में उपस्थित रहे। अतिथियों को पुष्पगुच्छ और शाल देकर सम्मानित किया गया।

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