Prof Naima Khatoon with Prof M Mohsin Khan and Prof Asim Zafar Hosting the flag during the Republic Day Celebration
Prof Naima Khatoon, Prof M Mohsin Khan and Prof Asim Zafar with NSS Cadets during the Republic Day Celebration
एएमयू ने 77वां गणतंत्र दिवस जोश और उत्साह के साथ मनाया
अलीगढ़, 26 जनवरीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 77वां गणतंत्र दिवस पूरे जोश, उल्लास और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नइमा खातून ने ऐतिहासिक स्ट्रैची हॉल पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इससे पहले एनसीसी कैडेट्स द्वारा पारंपरिक परेड प्रस्तुत की गई।
कुलपति ने अपने संबोधन में कहा कि हम आज ऐतिहासिक स्ट्रैची हॉल में केवल संविधान के अंगीकरण का स्मरण करने के लिए ही नहीं, बल्कि देश की विकास यात्रा और उसके भविष्य के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी पर विचार करने के लिए एकत्र हुए हैं।
उन्होंने कहा कि जब शीतकालीन आकाश में तिरंगा लहराता है, तो यह हमें याद दिलाता है कि गणतंत्र केवल एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं है, बल्कि एक नैतिक संकल्प है, जिसे हम हर वर्ष अपने आचरण और विवेक से नया रूप देते हैं। गणतंत्र दिवस हमें यह समझने का अवसर देता है कि संविधान कोई स्थिर दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदारियों का एक जीवंत ढांचा है, जो सतर्कता, नैतिक प्रतिबद्धता और बौद्धिक साहस की मांग करता है। इसका वास्तविक स्वरूप केवल शासन संस्थाओं में ही नहीं, बल्कि विशेष रूप से शिक्षा संस्थानों में दिखाई देता है। इसी संदर्भ में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का विशेष महत्व है।
प्रो. नइमा खातून ने कहा कि एएमयू कभी भी केवल पारंपरिक अर्थों में एक विश्वविद्यालय नहीं रहा है। यह परंपरा और आधुनिकता, आस्था और तर्क, विविधता और एकता के बीच संवाद का केंद्र रहा है। ऐसे समय में स्थापित हुआ यह विश्वविद्यालय, जब शिक्षा स्वयं सुधार और प्रतिरोध का माध्यम थी, और इसने सदैव यह सिद्धांत अपनाया कि ज्ञान राष्ट्रसेवा का सबसे स्थायी रूप है।
कुलपति ने कहा कि जब देश ‘विकसित भारत /2047’ की ओर बढ़ रहा है, तब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों पर विशेष जिम्मेदारी है। आज गणतंत्र अपने विश्वविद्यालयों से केवल ज्ञान देने की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि विचारों में नेतृत्व, कार्यों में जिम्मेदारी और उद्देश्यों में ईमानदारी की अपेक्षा करता है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि एएमयू ने हमेशा इस भूमिका को समझा है।
उन्होंने कहा कि सर सैयद अहमद खान द्वारा स्थापना के समय से ही एएमयू शिक्षा को सशक्तिकरण, सुधार और राष्ट्रसेवा का माध्यम मानता आया है। सर सैयद का विश्वास था कि शिक्षा लोगों को आधुनिक दुनिया का आत्मविश्वास के साथ सामना करने योग्य बनाए, साथ ही उन्हें नैतिक मूल्यों से जोड़े रखे। उनका दूरदर्शी दृष्टिकोण किसी एक दौर तक सीमित नहीं था, बल्कि हर परिवर्तन के मोड़ के लिए था और वर्ष 2026 भी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
परिसर जीवन की गुणवत्ता में सुधार का उल्लेख करते हुए कुलपति ने कहा कि छात्रावासों और शैक्षणिक परिसरों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाया गया है, साथ ही विरासत भवनों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि हम केवल इमारतों का ही नहीं, बल्कि विश्वास और अपनत्व की भावना का भी पुनर्निर्माण कर रहे हैं। संरक्षण और प्रगति दोनों साथ-साथ चल रहे हैं, जिससे ऐतिहासिक परिसर गरिमापूर्ण, उपयोगी और छात्र-केंद्रित बना रहे।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन शिक्षकों और छात्रों के शैक्षणिक, शोध और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सहयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। चाहे शोध सुविधाओं को मजबूत करना हो, अंतरविषयक कार्य को बढ़ावा देना हो, नवाचार का बढ़ावा हो या खेल, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी सुनिश्चित करना हो सभी प्रयास एक ही सिद्धांत पर आधारित हैं कि यदि ईमानदारी के साथ ज्ञान के पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश किया जाए, तो देश को उसका लाभ मिलता है।
छात्रों को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि भारत का भविष्य केवल नीतियों और संस्थानों से नहीं, बल्कि युवाओं के मूल्यों, कौशल और निर्णय क्षमता से तय होगा। उन्होंने कहा कि आपकी पीढ़ी जिस तरह ज्ञान से जुड़ती है, वही यह तय करेगा कि आने वाले दशकों की चुनौतियों से देश कैसे निपटेगा। एएमयू की विशेषता यह है कि यहां ज्ञान को टुकड़ों में नहीं देखा जाता, बल्कि आधुनिक विज्ञान ऐतिहासिक चेतना के साथ आगे बढ़ता है, तकनीक सांस्कृतिक स्मृति से जुड़ी रहती है और शिक्षा भारत की अवधारणा से संबंध बनाए रखती है।
कुलपति ने कहा कि हमें उन महान विचारकों को नहीं भूलना चाहिए, जिन्होंने देश की नैतिक और संवैधानिक सोच को आकार दिया। महात्मा गांधी हमें यह सिखाते हैं कि शिक्षा को सत्य और नैतिक साहस की सेवा करनी चाहिए, जबकि डॉ. भीमराव अंबेडकर यह याद दिलाते हैं कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन और लोकतंत्र की मजबूती का सबसे शक्तिशाली साधन है। दोनों ही यह बताते हैं कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब वह स्वतंत्रता को बढ़ाए और न्याय को गहरा करे।
उन्होंने कहा कि जब हम ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं, तब संदेश स्पष्ट हैविकास बुद्धिमान होना चाहिए, प्रगति मानवीय होनी चाहिए, विकास टिकाऊ होना चाहिए और ज्ञान नैतिक बना रहना चाहिए। यह समय है जब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को केवल परिवर्तन के अनुरूप ढलने के बजाय उसका नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने विश्वास दिलाया कि एएमयू आगे भी न केवल कुशल पेशेवर, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करता रहेगा।
कार्यक्रम में एएमयू की छात्रा मायशा मनाल ताज और छात्र अबू दाऊद ने भी अपने विचार रखे। रजिस्ट्रार प्रो. आसिम जफर ने शपथ दिलाई और कार्यक्रम का संचालन किया।
इसके बाद कुलपति ने विश्वविद्यालय खेल समिति और दृष्टिबाधित छात्रों के लिए संचालित अहमदी स्कूल द्वारा आयोजित मैराथन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए।
विश्वविद्यालय खेल समिति द्वारा आयोजित गणतंत्र दिवस मिनी मैराथन में पुरुष वर्ग में हैदर अब्बास, एम. कमर आबेदीन और कृष्णा सिंह ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया, जबकि महिला वर्ग में काजल चैधरी, वंशिका राज और यशा मजहर ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल किया। वहीं अहमदी स्कूल द्वारा आयोजित गणतंत्र दिवस मैराथन में बालक वर्ग में सैफ अंसारी, शौकत अहमद मलिक और अरुण कुमार तथा बालिका वर्ग में आतिफा खातून, फैजिया खान और जहरा बतूल ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया।
इससे पूर्व सुबह 8 बजे एस.टी.एस. हाई स्कूल से प्रभात फेरी निकाली गई। कुलपति ने विश्वविद्यालय स्वास्थ्य सेवा केंद्र का दौरा कर भर्ती मरीज छात्रों से मुलाकात की और उन्हें फल वितरित किए। इसके अलावा सर सैयद हॉल के लॉन में पौधारोपण भी किया गया।
विश्वविद्यालय के विभिन्न कार्यालयों, संकायों, कॉलेजों, विभागों और स्कूलों में भी गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित किए गए। कुलपति आवास, प्रशासनिक भवन, मौलाना आजाद लाइब्रेरी, कला संकाय सहित विश्वविद्यालय के सभी स्कूलों और कॉलेजों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। डीन कार्यालयों, डीएसडब्ल्यू, प्रोवोस्ट कार्यालयों और प्रॉक्टर कार्यालय में भी ध्वजारोहण किया गया।
प्रशासनिक भवन, मौलाना आजाद लाइब्रेरी, विक्टोरिया गेट, यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक ऑडिटोरियम, बाब-ए-सैयद और कला संकाय भवन जैसी प्रमुख इमारतों को तिरंगे की रोशनी से सजाया गया।
गणतंत्र दिवस समारोह की पूर्व संध्या पर 25 जनवरी को यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक ऑडिटोरियम में मुशायरा भी आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो. नाइमा खातून ने की।
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