जेएनएमसी, एएमयू के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग द्वारा एमआईडीसीएबी कार्यशाला आयोजित
अलीगढ़, 16 जनवरीः नैदानिक उत्कृष्टता और नवाचार की अपनी सतत यात्रा को आगे बढ़ाते हुए, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग ने मिनिमली इनवेसिव कोरोनरी आर्टरी बाइपास सर्जरी (एमआईडीसीएबी) पर दो दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला का सफल आयोजन कर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। इस कार्यक्रम ने उन्नत हृदय-चिकित्सा और चिकित्सा शिक्षा के केंद्र के रूप में जेएनएमसीएच की बढ़ती प्रतिष्ठा को पुनः पुष्ट किया।
कार्यशाला में समकालीन न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनका उद्देश्य शल्य आघात को कम करना, रोगियों की रिकवरी को तेज करना और समग्र उपचार परिणामों में सुधार करना है। शैक्षणिक गतिविधियों का मुख्य आकर्षण लाइव ऑपरेटिव डेमोंस्ट्रेशन रहे, जिससे प्रतिभागियों को इस अत्यंत विशिष्ट प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।
कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि के रूप में गुजरात के भावनगर स्थित एचसीजी हॉस्पिटल के कार्डियक साइंसेज निदेशक डॉ. ब्रजमोहन सिंह उपस्थित रहे। उन्हें कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है और उनके नाम 5,000 से अधिक वयस्क हृदय शल्यक्रियाएँ दर्ज हैं। उनके साथ कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. अजय राठोड़ और फिजिशियन असिस्टेंट नरेंद्र कुमार शर्मा भी रहे, जिनकी विशेषज्ञता ने व्यापक पेरिऑपरेटिव और तकनीकी सहयोग सुनिश्चित किया।
कार्यशाला के दौरान दो रोगियों की एमआईडीसीएबी प्रक्रियाएँ सफलतापूर्वक की गईं, जिनके नैदानिक परिणाम उत्कृष्ट रहे। लाइव सर्जिकल सत्रों में उत्तर प्रदेश और दिल्ली के विभिन्न स्थानों से आए कार्डियोथोरेसिक सर्जनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का नेतृत्व प्रो. मोहम्मद आजम हसीन ने किया, जिन्होंने अतिथि संकाय के साथ मिलकर शल्यक्रियाएँ कीं। यह विभाग की जटिल न्यूनतम इनवेसिव हृदय प्रक्रियाओं में बढ़ते आत्मविश्वास और दक्षता को दर्शाता है। डॉ. सैयद शमायल रब्बानी ने बताया कि विभाग कई वर्षों से निरंतर सकारात्मक परिणामों के साथ न्यूनतम इनवेसिव हृदय शल्यक्रियाएँ कर रहा है और अब अत्यंत जटिल न्यूनतम इनवेसिव कोरोनरी प्रक्रियाओं तक प्रगति कर चुका है, जिससे जेएनएमसी देश के चुनिंदा सरकारी संस्थानों में शामिल हो गया है जो न्यूनतम इनवेसिव सीएबीजी करने में सक्षम हैं। सहायक प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद आमिर ने न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी के रोगी-केंद्रित लाभों, कम दर्द, शीघ्र रिकवरी और बेहतर सौंदर्यात्मक परिणाम पर प्रकाश डाला।
एनेस्थीसिया सेवाओं का कुशल प्रबंधन डॉ. नदीम और डॉ. मनाजिर के नेतृत्व वाली टीम ने किया, जबकि परफ्यूजन सहयोग डॉ. साबिर अली खान और इरशाद कुरैशी द्वारा प्रदान किया गया। शल्य सहायक के रूप में सलमान, असलम और कामरान ने सहयोग दिया, तथा समर्पित पोस्टऑपरेटिव आईसीयू देखभाल सुहैल, रिनू, नदीम और कैलाश द्वारा सुनिश्चित की गई।
इस पहल को विश्वविद्यालय नेतृत्व कुलपति प्रो. नाइमा खातून, चिकित्सा संकाय के डीन प्रो. मोहम्मद खालिद और जेएनएमसी के प्राचार्य प्रो. अंजुम परवेज का सशक्त प्रोत्साहन प्राप्त हुआ। उन्होंने विभाग के प्रयासों की सराहना की और रोगी देखभाल, प्रशिक्षण तथा संस्थागत उत्कृष्टता को सुदृढ़ करने में ऐसे अकादमिक और नैदानिक सहयोगों के महत्व को रेखांकित किया।
No comments:
Post a Comment