Thursday, January 8, 2026

Dr Najish Begum (centre)with Justice MarkandeyKatju honoured for Contributions to Women’s Education




 
Dr Najish Begum (centre)with Justice MarkandeyKatju honoured for Contributions to Women’s Education

डॉ. नाजिश को शुक्ल, सुश्री रोशनी रावत, अधिवक्ता ज्ञान मित्रा लिए न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू ने किया सम्मानित

अलीगढ़, 7 जनवरीः अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वीमेंस कालिज में हिन्दी की एसोसिएट प्रोफेसरडॉ. नाजिश बेगमको महिला शिक्षा एवं सशक्तिकरण विषय पर एचकेएस सुरजीत हॉलसमीप राउज एवेन्यू कोर्ट दिल्ली में क्रिएटिव फाउंडेशन दिल्ली द्वारा महान समाज सुधारकों सावित्रीबाई फुले एवं फातिमा शेख की जयंती पर आयोजित संगोष्ठी में महिला शिक्षाअकादमिक नेतृत्व और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिऐ न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजूपूर्व न्यायाधीशसर्वोच्च न्यायालय द्वारा सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन और संवैधानिक सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी साधन है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बौद्धिक स्वतंत्रता प्राप्त किए बिना वास्तविक समानता संभव नहीं है। उन्होंने सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख के संघर्ष को आज के संदर्भ में भी उतना ही प्रासंगिक बताया।

इस अवसर पर डॉ. नाजिश बेगम ने कहा कि फातिमा शेख ने न केवल लड़कियों को शिक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य कियाबल्कि उन्होंने सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर अपने ही घर में एक विद्यालय की स्थापना भी की। उन्होंने यह भी कहा कि जब-जब सावित्रीबाई फुले के योगदान को स्मरण किया जाएगातब-तब फातिमा शेख का नाम भी समान सम्मान और आदर के साथ लिया जाना चाहिएक्योंकि दोनों ने मिलकर भारत में महिला शिक्षा की मजबूत नींव रखी।

संगोष्ठी का उद्देश्य भारत में महिला शिक्षा की ऐतिहासिक विरासतसंवैधानिक अधिकारों और समकालीन सामाजिक चुनौतियों के संदर्भ में लैंगिक न्याय को सुदृढ़ करना था। सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख द्वारा आरंभ किए गए शैक्षिक आंदोलन को स्मरण करते हुए वक्ताओं ने कहा कि इन दोनों विभूतियों ने न केवल महिला शिक्षा की नींव रखीबल्कि सामाजिक परिवर्तन का मार्ग भी प्रशस्त किया।

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