Prof. Asia Sultana being honoured during the National Unani Conference in Mumbai
एएमयू शिक्षकों ने मुंबई में राष्ट्रीय यूनानी सम्मेलन में साक्ष्य-आधारित शोध प्रस्तुत किया
अलीगढ़, 18 फरवरीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अजमल खां तिब्बिया कालिज के इलाज-बित-तदबीर विभाग के शिक्षकों ने हकीम अजमल खान की जयंती के अवसर पर मुंबई स्थित यशवंतराव चव्हाण केंद्र में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। इस सम्मेलन का आयोजन केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा किया गया।
विभागाध्यक्ष प्रो. असिया सुल्ताना ने “चयापचय संकेत तंत्र और रक्त शर्करा नियंत्रण में आहार (मोटे अनाज) के प्रयोग का समेकित विश्लेषण” विषय पर आमंत्रित व्याख्यान दिया। उन्होंने विभिन्न नैदानिक अध्ययनों के आधार पर बताया कि आहार संबंधी उपाय इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ाने, चयापचय प्रक्रियाओं को संतुलित करने और रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रो. सुल्ताना ने यूनानी आहार सिद्धांतों को वैज्ञानिक समीक्षा और समेकित विश्लेषण पद्धति से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत-विशिष्ट आंकड़े तैयार करने के लिए सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक ढंग से तैयार शोध योजनाएं अत्यंत आवश्यक हैं।
इसी विभाग के प्रो. मोहम्मद अनवर ने “दीर्घकालिक जोड़संबंधी रोगों में इलाज-बित-तदबीर पद्धतियों का साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने संधिवात रोगों में इलाज-बित-तदबीर के उपयोग से संबंधित उपलब्ध नैदानिक प्रमाणों का विश्लेषण करते हुए मानकीकृत उपचार पद्धतियों, कठोर नैदानिक परीक्षणों और स्पष्ट परिणाम मानकों की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि वैज्ञानिक विश्वसनीयता बढ़ाई जा सके और रोगियों की देखभाल को और बेहतर बनाया जा सके।
सम्मेलन में देशभर के विशेषज्ञों ने भाग लिया और यूनानी चिकित्सा पद्धति को आधुनिक वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया।
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