Prof Syed Ziaur Rahman speaking at the National Meet on Strengthening Pharmacovigilance System
जेएनएमसी ने फार्माकोविजिलेंस प्रणाली को सुदृढ़ करने पर राष्ट्रीय बैठक में लिया भाग
अलीगढ़, 5 मार्चः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज ने भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपीआई) और मटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (एमवीपीआई) के अंतर्गत क्षेत्रीय केंद्रों की पहली वार्षिक बैठक में भाग लिया। “भारत में फार्माकोविजिलेंस और मटेरियोविजिलेंस को सुदृढ़ बनाना” विषय पर आयोजित यह दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) द्वारा आंध्र प्रदेश मेडटेक जोन, विशाखापत्तनम के सहयोग से आयोजित की गई।
बैठक में नियामक प्राधिकरणों, एम्स सहित प्रमुख चिकित्सा संस्थानों और भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन के कंट्री ऑफिस के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा के लिए नियामक संस्थाओं, स्वास्थ्य संस्थानों और निगरानी केंद्रों के बीच समन्वय को मजबूत करना था। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण एडीआर पीवीपीआई 2.0 मोबाइल एप्लीकेशन का शुभारंभ रहा, जिसके माध्यम से दवाओं से होने वाली प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की रियल-टाइम रिपोर्टिंग संभव होगी।
जेएनएमसी में एएमसी-पीवीपीआई और आरटीसी-एमवीपीआई के समन्वयक प्रो. सैयद जियाउर रहमान ने रोकथाम योग्य प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं (एडीआर) के दस्तावेजीकरण और विश्लेषण पर एक कार्य समूह सत्र का संचालन किया। फार्माकोविजिलेंस एसोसिएट गुफरान अली और मटेरियोविजिलेंस एसोसिएट डॉ. रशाद अहमद खान ने भी रोकथाम योग्य एडीआर और चिकित्सा उपकरणों से संबंधित घटनाओं की संरचित रिपोर्टिंग पर चर्चा में योगदान दिया।
बैठक के दौरान आईपीसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने सिद्धांततः यह सहमति भी दी कि जेएनएमसी के एएमसी-पीवीपीआई को निकट भविष्य में क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र (आरटीसी-पीवीपीआई) के रूप में उन्नत किया जाएगा। साथ ही आम जनता की भागीदारी और समावेशिता बढ़ाने के लिए एडीआर रिपोर्टिंग फॉर्म को उर्दू भाषा में भी उपलब्ध कराने की पहल पर सहमति बनी।
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