CHIRAGH PASWAN MINISTER
Union Minister Shri Chirag Paswan inaugurates National Conference on ‘Eco-Inclusive Packaging in Food Processing’ at Jamia Millia Islamia; Calls for stronger collaboration between industry, regulatory bodies and research institutions
केंद्रीय मंत्री श्री चिराग पासवान ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में ‘इको-इनक्लूसिव पैकेजिंग इन फूड प्रोसेसिंग' पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया; इंडस्ट्री, रेगुलेटरी बॉडीज़ और रिसर्च इंस्टीट्यूशंस के बीच मजबूत सहयोग का किया आह्वान
भारत सरकार के माननीय केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने आज जामिया मिल्लिया इस्लामिया के अंसारी ऑडिटोरियम में 'खाद्य प्रसंस्करण में इको-इनक्लूसिव पैकेजिंग इन फ़ूड प्रोसेसिंग: ब्रिजिंग सस्टेनेबिलिटी, जेंडर एंड इनोवेशन’ विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) के कुलपति प्रो. मजहर आसिफ़ और रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी भी उपस्थित थे। इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 'सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल इनक्लूजन' (CSSI) द्वारा, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) और 'राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद' (NCPUL) के सहयोग से किया गया है। इस एक दिवसीय सम्मेलन में देश भर से 300 से अधिक NGO ने भाग लिया, जिसमें तीन तकनीकी सत्र शामिल थे।
उद्घाटन सत्र की शुरुआत NCC कैडेट्स द्वारा दिये गए औपचारिक 'क्वार्टर गार्ड ऑफ ऑनर' के साथ हुई, जिसने कार्यक्रम को एक औपचारिक गरिमा प्रदान की। मंच पर उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में डॉ. आभा रानी सिंह (IRS), अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (NMDFC), अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार; और डॉ. एम. जे. खान, चेयरमैन एमेरिटस, इंडियन चैंबर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर तथा प्रो. तनूजा, मानद निदेशक सीएसएसआई, जेएमआई शामिल थे।
यह कहते हुए कि उन्हें "एक ऐसे विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों के बीच उपस्थित होकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है, जिसे किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है" और यह कि "यदि उन्हें अवसर मिला होता, तो वे भी जामिया के छात्र बनना पसंद करते", माननीय केंद्रीय मंत्री श्री पासवान ने अपने उद्घाटन भाषण में इस क्षेत्र में सतत खाद्य प्रसंस्करण, पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग और समावेशी नवाचार के प्रति सरकार की पहलों और दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग न केवल भारत के भीतर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में, बल्कि दुनियाभर के देशों में उपभोक्ताओं तक पौष्टिक और उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पाद पहुँचाने में भी एक अहम भूमिका निभाएगा।
श्री पासवान ने कहा कि हरित क्रांति ने यह सुनिश्चित किया कि भारत में अनाज का अतिरिक्त उत्पादन शुरू हो, लेकिन आज की ज़रूरत है कि "इस मात्रा को मूल्य में बदला जाए"। खाद्य प्रसंस्करण और कृषि क्षेत्र में गुणवत्ता के महत्व, साथ ही वैश्विक मानकों और गुणवत्ता आश्वासन की अहमियत पर ज़ोर देते हुए, माननीय मंत्री ने कहा कि इस उद्योग को 'विकसित भारत 2047' के विज़न के साथ खुद को जोड़ना होगा। "पिछले 11 वर्षों में भारत सरकार से इस क्षेत्र को जिस तरह का ध्यान मिला है, वह अभूतपूर्व है। सरकार इस क्षेत्र में FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) लाने में सफल रही, जिसकी कमी अब तक महसूस की जा रही थी।" श्री पासवान ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विज़न- भारत को "वैश्विक खाद्य टोकरी" (Global Food Basket) बनाने के विज़न को दोहराया और कहा कि हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि दुनिया भर में हर डाइनिंग टेबल पर कम से कम एक 'मेड इन इंडिया' खाद्य पदार्थ परोसा जाए।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और इसके विभिन्न क्षेत्रों में गुणवत्ता के महत्व पर जोर देते हुए, माननीय मंत्री श्री पासवान ने आगाह किया कि किसी अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह पर अस्वीकृत (रिजेक्ट) हुआ एक भी कंसाइनमेंट भारत की सावधानीपूर्वक बनाई गई छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। उनके मंत्रालय और सभी हितधारकों का लक्ष्य ऐसी प्रतिष्ठा बनाना होना चाहिए, जिसके बारे में यह कहा जाए कि "अगर कोई चीज़ भारत से आई है, तो वह निश्चित रूप से बहुत उच्च गुणवत्ता की होगी।"
केंद्रीय मंत्री ने उद्योग, नियामक निकायों और जेएमआई जैसे अनुसंधान संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में विकास की अपार संभावनाएं हैं, विशेष रूप से 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' के तहत PMFME जैसी प्रभावशाली योजनाओं के कारण। इसलिए, श्री पासवान ने छात्रों से इस क्षेत्र में उभरते अवसरों का लाभ उठाने और इसमें सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय और यह योजना आवश्यक सहयोग और सही माहौल प्रदान करेगी, ताकि भविष्य के उद्यमी—विशेष रूप से युवा—छोटे पैमाने के उद्यमियों से आगे बढ़कर सूक्ष्म, मध्यम और अंततः बड़े पैमाने के उद्यमी बन सकें और उद्योग के अग्रणी नेता के रूप में उभर सकें। श्री पासवान ने कहा, "यह युवा ही हैं जो 'विकसित भारत 2047' के विज़न को साकार करेंगे, क्योंकि हम 21वीं सदी की उस अगली तिमाही में प्रवेश कर रहे हैं, जिसमें वर्ष 2047 आता है।" उन्होंने जेएमआई के युवाओं और छात्रों से अपने सपनों का पीछा करने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के मामले में अत्यंत महत्वाकांक्षी बनने का आग्रह किया, क्योंकि वे ही देश का भविष्य हैं।
यह कहते हुए कि भोजन की बर्बादी की चुनौती को तत्काल हल करने की आवश्यकता है, श्री पासवान ने श्रोताओं को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होने और ऐसी प्रथाओं व पैकेजिंग सामग्री को अपनाने की आवश्यकता याद दिलाई जो पृथ्वी के नाजुक इकोसिस्टम के लिए हानिकारक न हों; क्योंकि हम सभी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि "हम अपनी भावी पीढ़ियों को धरती माँ उसी स्थिति में लौटाएँ, जिस स्थिति में हमने इसे अपने पूर्वजों से विरासत में पाया था।"
अपने संबोधन में, जेएमआई के कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ़ ने शिक्षा जगत, सरकार और उद्योग के बीच सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से स्थिरता और समावेश को बढ़ावा देने में उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर ज़ोर दिया, और बताया कि जामिया जैसे अनुसंधान संस्थान इसमें कितनी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। प्रो. आसिफ़ ने कहा कि 'चिराग' पासवान नाम ज्ञान, नूर, इल्म और आशा का प्रतीक है, और उन्होंने केंद्रीय मंत्री को उस बेहतरीन काम के लिए बधाई दी जो वह और उनका मंत्रालय देश के किसानों तथा कृषि व खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए कर रहे हैं। केले और केले के फूलों, बाँस की कोंपलों और कटहल के उदाहरण देते हुए—जिनमें यदि सही ढंग से उपयोग किया जाए तो प्रसंस्करण और विपणन की अपार क्षमता है—प्रो. आसिफ़ ने छोटे गाँवों के किसानों तक नवीनतम नवाचारों और तकनीकी जानकारी पहुँचाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, ताकि इसका लाभ केवल बड़े शहरों और बड़े पैमाने के किसानों तक ही सीमित न रह जाए।
अपने संबोधन में, जेएमआई के रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी ने भारत में खाद्य प्रसंस्करण के बढ़ते क्षेत्र में अंतर्विषयक संवाद और नीति-प्रासंगिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि युवा और अत्यंत ओजस्वी केंद्रीय मंत्री श्री चिराग पासवान के नेतृत्व में—जिनमें अपने पिता, महान नेता और प्रख्यात राजनेता श्री राम विलास पासवान जी की तरह ही अपनी जड़ों से जुड़ाव, विनम्रता और दूरदृष्टि कूट-कूटकर भरी है—मंत्रालय भारत के पोषण पारिस्थितिकी तंत्र को एक सुदृढ़ और आत्मनिर्भर व्यवस्था के रूप में पुनर्परिभाषित करने के लिए तत्पर है। यह बताते हुए कि पिछले 11 वर्षों में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र ने प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है, प्रो. रिज़वी ने कहा कि जेएमआई खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के अंतर्गत अनुसंधान और शिक्षण संबंधी गतिविधियों में मंत्रालय के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक है।
स्वागत भाषण देते हुए, अकादमिक मामलों की डीन और CSSI की कार्यवाहक निदेशक प्रो. तनुजा ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सतत और समावेशी दृष्टिकोणों के महत्व पर प्रकाश डाला, और विशेष रूप से जेंडर, नवाचार तथा पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के अंतर्संबंधों पर ज़ोर दिया। सत्र का समापन संयोजक डॉ. अरविंद कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके बाद राष्ट्रगान हुआ; इसके साथ ही उद्घाटन समारोह की कार्यवाही संपन्न हुई।
प्रोफेसर साइमा सईद
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी
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