Tuesday, March 17, 2026

JMI Registrar Prof. Md. Mahtab Alam Rizvi Awarded ICSSR Major Research Project


Prof. Md. Mahtab Alam Rizvi

 JMI Registrar Prof. Md. Mahtab Alam Rizvi Awarded ICSSR Major Research Project on Pasmanda Muslims and National Integration in Viksit Bharat; study to highlight their historical and cultural connections with broader civilizational traditions of Bharat

जामिया के रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी को 'विकसित भारत' में पसमांदा मुसलमानों और राष्ट्रीय एकता पर ICSSR का एक बड़ा रिसर्च प्रोजेक्ट मिला; यह स्टडी भारत की व्यापक सभ्यतागत परंपराओं के साथ उनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ावों को उजागर करेगी

  

जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) के रजिस्ट्रार, प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी को इंडियन काउंसिल ऑफ़ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) द्वारा 'विकसित भारत' के विज़न में पसमांदा मुसलमानों और राष्ट्रीय एकता में उनकी भूमिका पर एक प्रतिष्ठित 'मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट' अवार्ड किया गया है।

 

यह रिसर्च पसमांदा मुसलमानों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सांस्कृतिक जड़ों, भाषाई आधारों और सामाजिक-राजनीतिक वास्तविकताओं की पड़ताल करती है; ये भारत की मुस्लिम आबादी का एक बड़ा, लेकिन ऐतिहासिक रूप से कम अध्ययन किया गया तबका हैं। अनुमान है कि भारत में मुस्लिम आबादी का लगभग 80-85 प्रतिशत हिस्सा पसमांदा मुसलमानों का है, फिर भी उनकी सामाजिक स्थितियों और देश के सांस्कृतिक व सामाजिक ताने-बाने में उनके योगदान पर अक्सर अकादमिक जगत में सीमित ही ध्यान दिया गया है।

 

इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पसमांदा समुदायों और भारत की व्यापक सभ्यतागत परंपराओं के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ावों को उजागर करना है। यह रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों, रोज़मर्रा की परंपराओं, भाषाई व्यवहारों और व्यावसायिक भूमिकाओं में भारत के विभिन्न समुदायों के साथ समानताओं की पड़ताल करता है। ऐसा करके, यह रिसर्च मुसलमानों को एक 'एकल समूह' (monolithic bloc) के रूप में देखने की व्यापक धारणा को चुनौती देती है, और इसके बजाय भारतीय मुस्लिम समाज के भीतर मौजूद विविधता और स्वदेशी जड़ों की ओर ध्यान आकर्षित करती है।

 

यह रिसर्च इस बात की पड़ताल करेगी कि कैसे समकालीन सरकारी पहलों और विकास-उन्मुख नीतियों ने—जिनका उद्देश्य धार्मिक या जातिगत पहचानों की परवाह किए बिना सभी परिवारों को लाभ पहुँचाना है—हाल के वर्षों में पसमांदा समुदायों को प्रभावित किया है।

 

यह स्टडी इस बात की भी पड़ताल करेगी कि भारत में अन्य पिछड़े और हाशिये पर पड़े समुदायों के साथ पसमांदा मुसलमानों की साझा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जड़ों को मान्यता देना, किस प्रकार अधिक सामाजिक सद्भाव में योगदान दे सकता है। उनके सामाजिक-सांस्कृतिक जुड़ावों और विकास संबंधी आकांक्षाओं को उजागर करके, यह रिसर्च भारत में राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सद्भाव को मज़बूत करने के तरीकों की पड़ताल करना चाहती है।

 

इस प्रोजेक्ट का मिलना, भारत के बदलते सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में समावेशी विकास, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता पर होने वाली रिसर्च के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। इसे जेएमआई के लिए एक बड़ी अकादमिक उपलब्धि के तौर पर भी देखा जा रहा है, जो अनुसंधान के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को और मज़बूत करती है। यह अनुसंधान समाज की प्रमुख चुनौतियों का समाधान करता है और 'विकसित भारत' के व्यापक दृष्टिकोण में अपना योगदान देता है।

 

जेएमआई के माननीय कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ़ ने भी अनुसंधान के इस अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र में एक बड़ा प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी को बधाई दी।

 

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