Friday, March 13, 2026

Dr. Zakir Husain Library, Jamia Millia Islamia, organizes a special exhibition on 'The Holy Quran'




 Dr. Zakir Husain Library, Jamia Millia Islamia, organizes a special exhibition on 'The Holy Quran'

डॉ. ज़ाकिर हुसैन पुस्तकालयजामिया मिल्लिया इस्लामियाने 'पवित्र कुरानपर एक विशेष

 प्रदर्शनी का आयोजन कियाजिसमें 35 दुर्लभ और वैज्ञानिक रूप से संरक्षित पांडुलिपियों को प्रदर्शित किया गया।

 

जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआईके डॉ. ज़ाकिर हुसैन पुस्तकालय ने रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान 'पवित्र कुरानशीर्षक से एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन कियाजिसमें इस पवित्र ग्रंथ से जुड़ी बौद्धिककलात्मक और आध्यात्मिक विरासत का उत्सव मनाया गया। इस प्रदर्शनी में कुरान की 35 दुर्लभ और वैज्ञानिक रूप से संरक्षित पांडुलिपियों को प्रदर्शित किया गया हैजो 15वीं सदी से लेकर 20वीं सदी की शुरुआत तक की हैं और इस्लामी सुलेख (कैलिग्राफी) की विविध परंपराओं तथा कलात्मक अलंकरणों को दर्शाती हैं। 7वीं से 14वीं सदी तक कुरानी सुलेख के विकास को दर्शाने वाले क्यूरेटेड पोस्टरों की एक श्रृंखला भी प्रदर्शित की गई हैजो आगंतुकों को कुरानी लिपि शैलियों के ऐतिहासिक विकास की एक व्यापक दृश्य अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।

 

इस विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन जेएमआई के माननीय कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ़ ने किया। इस अवसर पर जेएमआई के प्रतिष्ठित रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिज़वीपरीक्षा नियंत्रक प्रो. एहतेशामुल हक़छात्र कल्याण डीन प्रो. नीलोफ़र अफ़ज़लवित्त अधिकारी प्रो. मो. कमालुन नबीऔर डॉ. ज़ाकिर हुसैन पुस्तकालय के विश्वविद्यालय लाइब्रेरियन डॉ. विकास एस. नागराले भी विशिष्ट रूप से उपस्थित थे। प्रदर्शनी में डीनविभागाध्यक्षकेंद्रों के निदेशकसुरक्षा सलाहकारछात्रावासों के प्रोवोस्टसंकाय सदस्यजामिया स्कूलों के प्रधानाचार्यकर्मचारी और छात्रों की भारी उपस्थिति देखी गईसभी ने इस संग्रह और प्रदर्शनी की बहुत सराहना की।

 

पांडुलिपियों के अलावाप्रदर्शनी में पवित्र कुरान के मुद्रित संस्करण भी कई भारतीय भाषाओं में प्रदर्शित किए गए हैंजिनमें मलयालमकन्नड़हिंदीउर्दूतमिल और बंगाली शामिल हैं। कई अंतरराष्ट्रीय अनुवाद भी प्रदर्शित किए गए हैंजो चीनीजापानीजर्मनफ्रेंचतुर्कीरूसीअंग्रेजीस्पेनिशअल्बानियाईम्यांमार (बर्मी) और फ़ारसी जैसी भाषाओं में उपलब्ध हैं। पवित्र कुरान का एक ब्रेल संस्करण भी प्रदर्शित किया गयाजो पहुंच और समावेशिता के प्रति पुस्तकालय की प्रतिबद्धता को उजागर करता है। अपने अध्यक्षीय भाषण मेंकुलपति प्रो. मज़हर आसिफ़ ने हमारी समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को संरक्षित करने और सुरक्षित रखने में पुस्तकालयों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने आगे कहा, "पुस्तकालय सभी राज्य भाषाओं में पवित्र कुरान की प्रतियां एकत्र करने के लिए प्रतिबद्ध हैताकि इसका संदेश एक व्यापक और अधिक विविध दर्शकों तक पहुंच सके।" उन्होंने आगे टिप्पणी की कि "सभी आसमानी ग्रंथ मानवता के लिए एक सार्वभौमिक संदेश देते हैंदयाकरुणा और आपसी सम्मान।" पवित्र कुरान के छंदों का उल्लेख करते हुएप्रो. आसिफ़ ने कहा कि एक सच्चा धार्मिक व्यक्ति सभी धर्मों का सम्मान करता है। उन्होंने दस्तावेजी विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों के लिए विश्वविद्यालय लाइब्रेरियन डॉ. विकास एस. नागराले और उनकी टीम की सराहना की।

 

इस अवसर पर बोलते हुएजेएमआई के रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी ने कुरान की पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण की सराहना की और इन अमूल्य खजानों को संरक्षित करने तथा विद्वानों और व्यापक समुदाय के लिए सुलभ बनाने के पुस्तकालय के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने न केवल कुरान पढ़नेबल्कि उसके अर्थ और संदेश को समझने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, "पवित्र कुरान व्यक्तिगत जीवन के लिए एक पूर्ण मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता हैजो शांतिनैतिक मूल्यों और नैतिक आचरण को बढ़ावा देता है। कुरान मानवता के लिए आचार संहिता का एक व्यापक रूप प्रदान करता है और सभी के लिए ज्ञान और मार्गदर्शन का एक कालातीत स्रोत बना हुआ है।"

इस कार्यक्रम में डॉ. ज़ाकिर हुसैन इस्लामिक अध्ययन संस्थान के मानद निदेशक प्रो. हबीबुल्ला खान द्वारा पवित्र कुरान पर एक अतिथि व्याख्यान भी दिया गया। अपने व्याख्यान मेंउन्होंने समझाया कि कुरान अल्लाह की ओर से एक दिव्य रहस्योद्घाटन है और इसका संदेश केवल मुसलमानों तक ही सीमित नहीं हैबल्कि यह सभी मनुष्यों के लिए है। उन्होंने कुरान द्वारा बढ़ावा दिए जाने वाले सार्वभौमिक मूल्योंजैसे न्यायसमानतादया और मानवाधिकारों के सम्मानपर जोर दियाऔर उन नैतिक सिद्धांतों पर प्रकाश डाला जिनका यह समर्थन करता हैइनमें एक न्यायपूर्ण और दयालु समाज के निर्माण के लिए क्या अनुमेय है और क्या वर्जितइस पर स्पष्ट मार्गदर्शन शामिल है।

 

डॉ. ज़ाकिर हुसैन पुस्तकालय के विश्वविद्यालय लाइब्रेरियन डॉ. विकास नागराले ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि इस कुरान प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पवित्र कुरान के संदेश को सभी मनुष्यों तक पहुंचाना हैसाथ ही पांडुलिपि विरासत को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के महत्व पर भी प्रकाश डालना है। इस कार्यक्रम को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य पवित्र कुरान में निहित मानवीय शिक्षाओं को जन-सामान्य तक पहुँचाना तथा समाज में शांतिभाईचारा और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है।

 

इसके बादकार्यक्रम की संयोजिका डॉ. उमैमा ने कुरान की पांडुलिपियों (मुद्रित और वेब-आधारित) की सूची (कैटलॉग) का परिचय दियाऔर साथ ही पुस्तकालय की अभिलेखीय संरक्षण तथा डिजिटलीकरण की पहलों के बारे में जानकारी दी।

 

इस कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण डॉ. ज़ाकिर हुसैन लाइब्रेरी में सुरक्षित रखे गए कुरान की हस्तलिपियों और दुर्लभ मुद्रित संस्करणों की सूची (कैटलॉग) का विमोचन था। इसमें कुरान की 71 हस्तलिपियाँ शामिल हैंजिनमें अनुवाद और टीकाएँ भी हैंएक ब्रेल कुरानकपड़े पर लिखी एक लिथोग्राफ हस्तलिपिऔर पवित्र कुरान के 37 दुर्लभ मुद्रित संस्करण शामिल हैं। इसके साथ हीएक वेब-आधारित इंटरैक्टिव कैटलॉग भी लॉन्च किया गयाजिसका उद्देश्य लाइब्रेरी के मूल्यवान हस्तलिपि संसाधनों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विद्वानों के लिए अधिक सुलभ बनाना है। कार्यक्रम के दौरान लाइब्रेरी की आंतरिक अभिलेखीय संरक्षण और डिजिटलीकरण गतिविधियों को दर्शाने वाली एक छोटी क्लिप भी दिखाई गई।

 

इस कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम के सह-संयोजक श्री जोहान एम. मीर ने कियाऔर डॉ. ज़ाकिर हुसैन पुस्तकालयजेएमआई के प्रो. शहबाज़ एच. नक़वी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

 

यह प्रदर्शनी डॉ. ज़ाकिर हुसैन लाइब्रेरीजामिया मिल्लिया इस्लामिया में 18 मार्च, 2026 तक आगंतुकों के लिए खुली रहेगी।

 

प्रो. साइमा सईद

मुख्य जनसंपर्क अधिकारी

No comments:

Popular Posts