Thursday, April 23, 2026

जामिया में 'एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी इन द 21st सेंचुरी’ विषय पर आयोजित सम्मेलन

 


Union Minister Shri Jitendra Singh emphasizes on 'building a strong green economy' while Union Minister MSME, Shri Jitan Ram Manjhi warns against deforestation at conference on 'Environmental Sustainability in the 21st Century' at JMI today 

आज जामिया में 'एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी इन द 21st  सेंचुरी’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री श्री जितेंद्र सिंह ने ‘बिल्डिंग ए स्ट्रांग ग्रीन इकॉनमीपर ज़ोर दियाजबकि केंद्रीय MSME मंत्री श्री जीतन राम मांझी ने वनों की कटाई रोकने के प्रति आगाह किया।

 

भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) - पृथ्वी विज्ञानविज्ञान एवं प्रौद्योगिकीतथा पीएमओ; कार्मिकलोक शिकायत और पेंशन; परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष मामलों के राज्य मंत्री - डॉ. जितेंद्र सिंह ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआईके पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन "21वीं सदी में पर्यावरणीय स्थिरता: विज्ञानसमाज और समाधान" के समापन समारोह में 'पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने की कुंजी के रूप में एक मजबूत हरित अर्थव्यवस्था के निर्माणका आह्वान किया। भारत के 12 राज्यों से आए प्रतिभागियों को प्रदर्शित करने वाले इस सम्मेलन को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) द्वारा प्रायोजित किया गया है। इसका उद्देश्य प्रतिष्ठित शिक्षाविदोंशोधकर्ताओंनीति निर्माताओं और उद्योग जगत के पेशेवरों के बीचपर्यावरण से जुड़ी गंभीर चुनौतियों और उनके स्थायी समाधानों पर सार्थक अकादमिक संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना है। जेएमआई के कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ़ और जेएमआई के कुलसचिव प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी ने इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई के कुलाधिपति और UGC के पूर्व अध्यक्ष प्रो. डी. पी. सिंहइंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय के डीन प्रो. मोहम्मद शरीफ़और सम्मेलन के सह-संयोजक प्रो. सिराजुद्दीन अहमद की उपस्थिति में माननीय केंद्रीय मंत्री श्री जितेंद्र सिंह जी का स्वागत किया।

 

जेएमआई के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रमुख और पृथ्वी दिवस के मौके पर हुई इस कॉन्फ्रेंस के संयोजक प्रो. राजीव सिंह ने अपने स्वागत भाषण में कहा, "इस कॉन्फ्रेंस का विषय बहुत सोच-समझकर चुना गया हैताकि यह संदेश दिया जा सके कि समाज और विज्ञान को मिलकर काम करना होगाएक-दूसरे का साथ देते हुए और एक-दूसरे को पूरा करते हुएताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण और धरती माँ को बचाया जा सके। 25 अलग-अलग शिक्षण और शोध संस्थानों से आए जाने-माने मुख्य वक्ता अलग-अलग तकनीकी सत्रों में चर्चा कर रहे हैंजिनमें पर्यावरण से जुड़े अलग-अलग विषयों पर 200 से ज़्यादा शोध पत्र और पोस्टर पेश किए गए।"

श्री जितेंद्र सिंह जी ने समय के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता पर ज़ोर दियाजिसके लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) जैसी तकनीकों को अपनानाहरित अर्थव्यवस्था के माध्यम से हरित रोज़गार सृजित करनातथा नई और नवीकरणीय ऊर्जाजैव प्रौद्योगिकी और जैव ईंधनमहासागरीय ऊर्जा और सबसे महत्वपूर्ण रूप से परमाणु ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि "पृथ्वी के ग्रीन ट्रांजीशन में भारत के पास एक अग्रणी भूमिका निभाने की क्षमता है।" माननीय मंत्री डॉ. सिंह जी ने यह भी कहा कि भारत के पास दुनिया में थोरियम का सबसे बड़ा भंडार हैजो सरकार के परमाणु मिशन को हासिल करने में बहुत मददगार साबित हो सकता है। यह बताते हुए कि भारत दुनिया के उन बहुत कम देशों में से एक होगा जहाँ परमाणु क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए खोला जाएगाश्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि 'अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन' (ANRF) के 'अनुसंधानविकास और नवाचार' (RDI) कोष में कुल ₹1 लाख करोड़ की राशि है। इस कोष में युवाओं के कल्याण और रोज़गार के अवसरों के लिए अनुसंधान और विकास को सही दिशा देने की अपार क्षमता है।

 

सूक्ष्मलघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री श्री जीतन राम मांझीजो अपनी सरकारी व्यस्तताओं के कारण इस कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकेउन्होंने समारोह के दौरान चलाए गए अपने वीडियो संदेश में पर्यावरण के सामने आने वाली सबसे बड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये चुनौतियाँ मुख्य रूप से शहरीकरण के कारण होने वाली अत्यधिक वनों की कटाई और पेड़ों को काटने से पैदा होती हैं। इसके परिणामस्वरूप पृथ्वी पर कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता बढ़ रही है और ओज़ोन परत के क्षरण के कारण पृथ्वी में UV किरणें प्रवेश कर रही हैं। इन कारणों से वनावरण और वर्षा में कमी आई हैजिससे फ़सलों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। इसके चलते बीमारियाँभूख और भुखमरी बढ़ी हैऐसी समस्याएँ जिनका सामना हम औद्योगीकरण के दौर से ही करते आ रहे हैं। यह स्थिति न केवल मनुष्यों के लिएबल्कि दुनिया के समस्त जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के लिए भी एक गंभीर ख़तरा बन गई है। श्री मांझी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हम इसी तरह आगे बढ़ते रहेतो पृथ्वी पर जीवन संकट में पड़ जाएगा। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे एकजुट होकर उस पर्यावरण और प्रकृति को बचाने का प्रयास करेंजिसे ईश्वर ने मनुष्यों के लिए बनाया है। जनसंख्या में असंतुलन और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएँप्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों के हमारे अंधाधुंध उपयोग के दूरगामी परिणामों के ही संकेत हैं।

 

प्रो. डी. पी. सिंह ने 'नई शिक्षा नीति 2020' (NEP 2020) में परिकल्पित उद्देश्यों के अनुरूप, 'वैश्विक नागरिकतैयार करने और टिकाऊ व पर्यावरण-अनुकूल परिसरों (कैंपस) को विकसित करने की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने आगे कहा कि हमारा मुख्य ध्यान विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के परिसरों को 'हरित' (ग्रीन) बनाने पर होना चाहिए। इसके अंतर्गतवर्षा जल संचयन (रेनवाटर हार्वेस्टिंग)अपशिष्ट प्रबंधनसौर ऊर्जा पर निर्भरता और साइकिल जैसे पर्यावरण-अनुकूल परिवहन साधनों के उपयोग को भावी पीढ़ियों के बीच प्रोत्साहित किया जाना चाहिएऔर इन प्रथाओं को उनके दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए। जेएमआई के रजिस्ट्रारप्रो. रिज़वी ने दर्शकों को याद दिलाया कि 'विकसित भारत 2047' का एक मुख्य लक्ष्य 2070 तक 'नेट ज़ीरोउत्सर्जन हासिल करने की प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व मेंसरकार कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण के नुकसान को कम करनेतथा प्रदूषण के उच्च स्तर पर लगाम लगाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) जैसी तकनीकों को अपनाकर हरित बुनियादी ढांचा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे के विस्तार और मेडिकल सीटों की संख्या में वृद्धि के माध्यम से "सभी के लिए स्वास्थ्य" (Health for All) के प्रति प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुएजिसमें देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का लक्ष्य भी शामिल हैप्रोफेसर रिज़वी ने माननीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह जी से अनुरोध किया कि वे जेएमआई को एक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल शुरू करने में सहायता करेंताकि 105 वर्ष पुराने इस विश्वविद्यालय में पहले से मौजूद 72 विभागों और अनुसंधान केंद्रों को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।

 

जामिया के वी सी प्रो. मज़हर आसिफ़ ने छात्रों से कचरा रीसायकल करनेदोबारा इस्तेमाल करने और उसे कम करने की अपील की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पृथ्वी और उसके प्राकृतिक संसाधन सीमित और खत्म होने वाले हैंइसलिए उन्हें बचाना और समझदारी से इस्तेमाल करना ज़रूरी है। वेदों का हवाला देते हुए—"सर्वे भवन्तु सुखिनःसर्वे सन्तु निरामयाः"उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन और संस्कृति की भावना के अनुरूपहम सभी को खुशीशांतिसद्भाव और सबके कल्याण को बढ़ावा देने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने आखिर में कहा कि यही पर्यावरण को टिकाऊ बनाने का रास्ता है और इसी तरह हम अपनी धरती माँ को बचा सकते हैं।

 

सम्मेलन की अन्य मुख्य बात यह रही कि इसमें डॉ. जगवीर सिंहवैज्ञानिक 'G' सलाहकारपृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) का मुख्य वक्तव्य शामिल थाजिन्होंने पर्यावरणीय स्थिरता प्राप्त करने के लिए सरकार द्वारा अपनाई गई विभिन्न नीतियों पर प्रकाश डाला।

 

इस कॉन्फ्रेंस का मकसद पर्यावरण को टिकाऊ बनाने के क्षेत्र में ज्ञाननए विचारों और बेहतरीन तरीकों को आपस में बाँटने के लिए एक मंच उपलब्ध कराना और भविष्य की पर्यावरण नीतियों को बनाने में अपना योगदान देना था।

 

प्रो. साइमा सईद

मुख्य जनसंपर्क अधिकारी

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