A two-day international conference on Lifelong Learning, Community Service, and the Potential of AI for Inclusive Social Transformation by DACEE, JMI, concludes
डीएसीईई, जामिया द्वारा 'लाइफलॉन्ग लर्निंग, कम्युनिटी सर्विस एंड द पोटेंशियल ऑफ़ एआई फॉर इनक्लूसिव सोशल ट्रांसफोरमेशन’ पर आयोजित दो-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न
जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) के सामाजिक विज्ञान संकाय के 'प्रौढ़ एवं सतत शिक्षा एवं विस्तार विभाग' (DACEE) ने, जामिया के शिक्षा संकाय; त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल; और एलोसियन पब्लिकेशन्स, फिलीपींस के सहयोग से, 6 अप्रैल, 2026 को दो-दिवसीय ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन का शीर्षक था—"'लाइफलॉन्ग लर्निंग, कम्युनिटी सर्विस एंड द पोटेंशियल ऑफ़ एआई फॉर इनक्लूसिव सोशल ट्रांसफोरमेशन’।" इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के 150 से अधिक प्रतिभागी अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। सम्मेलन का समापन आज एक समापन सत्र के साथ हुआ, जिसमें चर्चाओं से निकले प्रमुख निष्कर्ष और सुझाव प्रस्तुत गए।
उद्घाटन सत्र में अपना अध्यक्षीय भाषण देते हुए, जामिया के रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी ने विभाग और उसके अंतर्राष्ट्रीय सहयोगियों को एक सामाजिक रूप से प्रासंगिक और समकालीन विषय पर सम्मेलन आयोजित करने के लिए बधाई दी। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि तेज़ी से हो रहे तकनीकी विकास—विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में—शिक्षा, ज्ञान-सृजन और सामाजिक संवाद के परिदृश्य को बदल रहे हैं। उन्होंने AI पर अत्यधिक निर्भरता और व्यक्तियों में तर्क-शक्ति (reasoning) की कमी से उत्पन्न चुनौती को रेखांकित किया। उन्होंने आगे बताया कि आजीवन सीखने, सामुदायिक जुड़ाव और समावेशी विकास पर चर्चाएँ करना इसलिए आवश्यक है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि तकनीकी प्रगति, एक न्यायसंगत और सतत सामाजिक परिवर्तन में अपना योगदान दे सके।
उद्घाटन सत्र की शुरुआत पवित्र कुरान के पाठ (अनुवाद सहित) से हुई, जिसके बाद जामिया तराना और एलोसियन गीत बजाया गया। इसके उपरांत, जामिया के सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. ज़ुबैर मीनई ने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने शिक्षा, प्रौद्योगिकी और समाज के बीच बदलते संबंधों को समझने के लिए अंतर्विषयक संवाद और शोध के महत्व पर ज़ोर दिया।
स्वागत भाषण देते हुए, 'प्रौढ़ और सतत शिक्षा एवं विस्तार विभाग' की विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) नसरा शबनम ने विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने आजीवन सीखने, सामुदायिक विकास और विस्तार गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रति विभाग की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला, और समकालीन शैक्षिक तथा सामाजिक चुनौतियों से निपटने में अकादमिक सहयोग के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन विद्वानों और पेशेवरों के लिए विचारों के आदान-प्रदान हेतु एक मूल्यवान मंच प्रदान करता है, जहाँ वे इस बात पर चर्चा कर सकते हैं कि उभरती हुई तकनीकों का उपयोग समावेशी और सतत सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी ढंग से कैसे किया जा सकता है।
सम्मेलन के संयोजक डॉ. समीर बाबू एम. और डॉ. अनवारा हाशमी ने सम्मेलन का एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने इसके उद्देश्यों और मुख्य विषयों की रूपरेखा तैयार की, और तेज़ी से हो रहे तकनीकी विकास के संदर्भ में आजीवन सीखने की पद्धतियों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
इस सभा को विशिष्ट अतिथि, अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी विश्वविद्यालय की प्रो. शाहीन उस्मानी ने भी संबोधित किया। उन्होंने नवाचार, ज्ञान के आदान-प्रदान और सामाजिक रूप से प्रासंगिक अनुसंधान को बढ़ावा देने में विश्वविद्यालयों तथा अकादमिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में बात की।
नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय के डॉ. शिवराम पांडे ने एक मुख्य विषय प्रस्तुति दी। उन्होंने सम्मेलन की वैचारिक रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की, और तकनीकी प्रगति को समुदाय-उन्मुख सीखने के दृष्टिकोणों के साथ एकीकृत करने के महत्व पर प्रकाश डाला।
भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ (IAEA) के प्रो. एल. राजा ने आजीवन सीखने की परिवर्तनकारी क्षमता, और समकालीन शैक्षिक तथा विकासात्मक चुनौतियों से निपटने में उभरती हुई तकनीकों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। विभाग और उसके सहयोगी संस्थानों के प्रयासों की सराहना करते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन के दौरान होने वाले विचार-विमर्श से सार्थक अंतर्दृष्टि प्राप्त होगी, और ऐसे अकादमिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा जो विद्वतापूर्ण ज्ञान तथा सामुदायिक विकास, दोनों में योगदान देंगे।
उद्घाटन सत्र का समापन डॉ. अनवारा हाशमी द्वारा दिए गए धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट वक्ताओं, सहयोगी संस्थानों, आयोजन समिति के सदस्यों और प्रतिभागियों के बहुमूल्य योगदान तथा उपस्थिति के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। वैश्विक सहयोग के सम्मान में भारत, नेपाल और फिलीपींस के राष्ट्रगान भी हुए। उद्घाटन सत्र के बाद, सम्मेलन में तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें शोध पत्रों की प्रस्तुति और विषयगत चर्चाएँ शामिल थीं। इन सत्रों में विभिन्न संस्थानों के विद्वानों ने आजीवन सीखने, सामुदायिक जुड़ाव, डिजिटल परिवर्तन और समावेशी शिक्षा से संबंधित विषयों पर अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए।
प्रो. साइमा सईद
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी
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