Tuesday, November 11, 2025

JMI organizes a two days National Conference on Antimicrobial Resistance


जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने किया एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के जीवन विज्ञान संकाय के मूल विज्ञान में अंतःविषय अनुसंधान केंद्र (सीआईआरबीएससी) ने 6-7 नवंबर 2025 को “फ्रंटियर्स इन एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस (एएमआर): रिसर्च, पॉलिसी, एंड प्रैक्टीस” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। यह कार्यक्रम जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 105वें स्थापना दिवस समारोह का हिस्सा था। एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस, या एएमआर, इक्कीसवीं सदी की सबसे विकट वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है। प्रतिरोधी रोगाणुओं की खतरनाक वृद्धि दशकों की चिकित्सा प्रगति को कमजोर करने का खतरा पैदा करती है, जिससे जन स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण, सभी के लिए गंभीर खतरा पैदा होता है। प्रतिरोधी रोगाणुओं की खतरनाक वृद्धि दशकों की चिकित्सा प्रगति को कमजोर करने का खतरा पैदा कर रही है, जिससे जन स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण, सभी के लिए गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। यह सम्मेलन विद्वानों के संवाद और सहयोगात्मक आदान-प्रदान के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है, जहाँ शोधकर्ताओं, चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और हितधारकों को एएमआर अनुसंधान, निगरानी, अभ्यास और रणनीतिक नीतिगत हस्तक्षेपों में नवीनतम विकास पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ लाया गया।

 

सम्मेलन का उद्घाटन सत्र 6 नवंबर 2025 को आयोजित किया गया। सम्मेलन की शुरुआत कुरान की तिलावत और उसके बाद जामिया तराना के गायन से हुई। इसके बाद, गणमान्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस सत्र में प्रो. मज़हर आसिफ़ (कुलपति, जामिया मिल्लिया इस्लामिया), प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी (रजिस्ट्रार, जेएमआई), मुख्य अतिथि (प्रो. आर. सी. कुहाड़, कुलपति, स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय, कोकराझार, असम), विशिष्ट अतिथि (प्रो. एस. के. श्रीवास्तव, कुलपति, बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय, लखनऊ, उत्तर प्रदेश) और मुख्य वक्ता (प्रो. राजीव सूद, कुलपति, बाबा फ़रीद यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंसेज, फ़रीदकोट, पंजाब) उपस्थित थे। उद्घाटन सत्र में प्रो. ज़ाहिद अशरफ़ (जीव विज्ञान संकाय के डीन), प्रो. राजन पटेल (सीआईआरबीएससी के अध्यक्ष एवं निदेशक), प्रो. तनुजा (जामिया विश्वविद्यालय की शैक्षणिक मामलों की डीन और सम्मेलन की संयोजक), प्रो. शमा परवीन (आयोजन सचिव), जीव विज्ञान संकाय के संकाय सदस्य एवं शोधार्थी तथा प्रतिभागी उपस्थित थे। गणमान्य व्यक्तियों ने इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के आयोजन के लिए आयोजन समिति की सराहना की। 

 

उद्घाटन सत्र के दौरान, प्रो. शमा परवीन ने श्रोताओं को सम्मेलन के बारे में जानकारी दी। प्रो. राजन पटेल ने स्वागत भाषण देते हुए सीआईआरबीएससी में अंतःविषय अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रो. ज़ाहिद अशरफ़ ने एएमआर और अन्य शोध-आधारित प्रगति के क्षेत्र में जीवन विज्ञान संकाय की उपलब्धियों के बारे में बताया। प्रो. तनुजा ने अकादमिक उत्कृष्टता और समुदाय-केंद्रित शिक्षा को बढ़ावा देने में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की भूमिका पर ज़ोर दिया। प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी ने सभा को संबोधित किया और एक सार्थक शैक्षणिक मंच बनाने में आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सम्मेलन के दौरान उत्पन्न ज्ञान को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाने के महत्व पर भी ज़ोर दिया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अंतर्दृष्टि और शोध के परिणाम जन जागरूकता और शैक्षणिक उन्नति में योगदान दें। उद्घाटन समारोह का अध्यक्षीय भाषण जामिया मिल्लिया इस्लामिया के माननीय कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ़ ने दिया, जिन्होंने एएमआर का मुकाबला करने के लिए प्रभावशाली शोध को आगे बढ़ाने और नवाचार को बढ़ावा देने में शैक्षणिक संस्थानों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने एएमआर की रोकथाम के लिए सहयोगात्मक वैज्ञानिक प्रयासों और सामुदायिक जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने संक्रमण के जोखिम को कम करने और एएमआर की समस्या से निपटने के लिए निवारक उपाय के रूप में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर भी ज़ोर दिया। 

 

प्रो. कुहाड़ ने दुनिया भर में रोगाणुरोधी प्रतिरोध के खतरनाक उदय पर प्रकाश डाला, सहयोगी अनुसंधान, जन जागरूकता, तर्कसंगत एंटीबायोटिक उपयोग और मजबूत नीति तंत्र की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने देश भर में शैक्षणिक ज्ञान के कुशल प्रसार के लिए देश भर में एनईपी-2020 के कार्यान्वयन पर भी ध्यान केंद्रित किया। इस कार्यक्रम में प्रो. एस. के. श्रीवास्तव का भी स्वागत किया गया, जिन्होंने एएमआर के प्रसार को कम करने के लिए निवारक रणनीतियों और अंतर-संस्थागत सहयोग के महत्व पर जोर दिया। मुख्य भाषण प्रो. राजीव सूद ने दिया, जिन्होंने एएमआर के नैदानिक प्रभाव, रोगी देखभाल में चुनौतियों और राष्ट्रीय और संस्थागत स्तर पर रोगाणुरोधी प्रबंधन कार्यक्रमों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बात की। इस अवसर पर प्रो. मजहर आसिफ़ ने आईआईटी रोपड़ के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और प्रसिद्ध प्रतिरक्षाविज्ञानी प्रो. जावेद अग्रेवाला का भी स्वागत किया और उन्हें शॉल देकर सम्मानित किया। प्रो. अग्रेवाला के प्रतिरक्षा विज्ञान, मेज़बान-रोगज़नक़ अंतःक्रियाओं और संक्रामक रोगों में टीका विकास के क्षेत्र में अग्रणी अनुसंधान ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई है, जिसमें सभी प्रमुख विज्ञान अकादमियों, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA), भारतीय विज्ञान अकादमी (IASc) और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत (NASI) के फेलो शामिल हैं। उन्हें उनके वैज्ञानिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। सम्मेलन में प्रो. अग्रेवाला के पूर्ण व्याख्यान में अगली पीढ़ी के माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस टीकों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें जन्मजात और अनुकूली प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं, दोनों पर ज़ोर दिया गया। 

 

सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें एएमआर प्रतिरोध का उद्भव और प्रसार, पर्यावरण में एएमआर, एएमआर का संक्रमण और प्रबंधन, प्रतिरोध के तंत्र, वैकल्पिक उपचार, एएमआर और नीति, एंटीवायरल दवा प्रतिरोध, एएमआर नैदानिक मामले पर चर्चा, अंतःविषयक विषय और टीके शामिल थे। सम्मेलन में प्रतिष्ठित शोध संस्थानों [सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (सीएसआईआर-आईजीआईबी, दिल्ली), आईआईएसईआर (भारतीय विज्ञान शिक्षा संस्थान, कोलकाता), ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (टीएचएसटीआई, फरीदाबाद), इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस, नई दिल्ली)], भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान [आईआईटी, दिल्ली, रोपड़], अस्पतालों [एम्स दिल्ली, वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल] और विश्वविद्यालयों [जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू), जामिया हमदर्द, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू), शिव नादर (दिल्ली-एनसीआर)] फंडिंग एजेंसियों [जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर)], कंपनियों [नेक्स्टजेन लाइफ साइंसेज, सम्मेलन को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और संकाय सदस्यों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों, डॉक्टरों, दंत चिकित्सकों, फार्मासिस्टों, स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों (एमबीबीएस/बीडीएस/बीफार्मा/एमफार्मा/एमबीए) सहित 400 से अधिक पंजीकृत प्रतिभागियों ने भाग लिया। दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू, एएमयू, जामिया हमदर्द, कलकत्ता विश्वविद्यालय, इंटीग्रल विश्वविद्यालय लखनऊ, एसजीटी गुरुग्राम, एमिटी नोएडा, आईआईटी, जेएमआई, एमडीएसयू अजमेर, शिव नादर विश्वविद्यालय दिल्ली-एनसीआर सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों से प्रतिभागी शामिल हुए। कुल 202 सारांश (25 आमंत्रित वार्ताएँ, अन्य 177 (136 पोस्टर प्रस्तुतियाँ और 41 मौखिक प्रस्तुतियाँ) प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन के दो दिनों में, 24 प्रमुख आमंत्रित वार्ताएँ, युवा संकाय/ छात्रों द्वारा मौखिक वार्ता के 7 समानांतर सत्र और पोस्टर प्रस्तुति सत्र आयोजित किए गए, जिससे एएमआर नीति चर्चा और सहयोग पर शोध के लिए एक इंटरैक्टिव मंच उपलब्ध हुआ।

 

सम्मेलन का समापन सत्र 7 नवंबर 2025 को आयोजित किया गया, जिसमें आयोजन सचिव ने माननीय कुलपति, कुलसचिव, कुलपति कार्यालय, कुलसचिव कार्यालय, वित्त कार्यालय, प्रॉक्टोरियल टीम जामिया प्रशासन आदि को उनके अटूट सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। डॉ. परवीन ने इस आयोजन में सहयोग के लिए संकाय सदस्यों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों, छात्रों और वोलेंटीयर्स का भी आभार व्यक्त किया। आयोजन समिति ने वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए डीबीटी, एएनआरएफ, डीआरडीओ और सीएसआईआर जैसी वित्त पोषण एजेंसियों के साथ-साथ अन्य प्रायोजकों का भी आभार व्यक्त किया। बीस सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुतियों और आठ सर्वश्रेष्ठ मौखिक प्रस्तुतियों के लिए भी योग्य उम्मीदवारों को पुरस्कृत किया गया। वक्ताओं, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और छात्रों की सक्रिय भागीदारी और सहभागिता ने सम्मेलन को और समृद्ध बनाया, जिससे एनसीएफएएमआर 2025 वास्तव में एक प्रभावशाली और यादगार आयोजन बन गया।

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