प्रो. सैयदा आमिना नाज अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के यूनानी चिकित्सा संकाय की डीन नियुक्त
अलीगढ़, 22 अगस्तः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अजमल खान तिब्बिया कॉलेज के निस्वान व कबालात (स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग) की प्रो. सैयदा आमिना नाज को विश्वविद्यालय के यूनानी चिकित्सा संकाय का डीन नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति 23 अगस्त, 2026 से दो वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी होगी।
प्रो. नाज ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हमदर्द तिब्बिया कॉलेज से बी.यू.एम.एस. की उपाधि प्राप्त की, जिसमें उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने एन.टी.आर. स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, हैदराबाद के राजकीय निजामिया तिब्बी कॉलेज से अमराज-ए-निस्वान व कबालात में एम.डी. की उपाधि प्राप्त की। वह जुलाई 2000 से स्नातकोत्तर स्तर पर अध्यापन से जुड़ी हैं। उन्होंने सात स्नातकोत्तर शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है और 11 अन्य शोधार्थियों के सह-मार्गदर्शक के रूप में कार्य किया है।
उन्होंने 2004 में अजमल खान तिब्बिया कॉलेज, एएमयू में स्त्री रोग एवं प्रसूति विशेषज्ञ के रूप में अपनी सेवाएं शुरू कीं। मार्च 2015 से वह अमराज-ए-निस्वान व अतफाल विभाग की अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रही हैं।
प्रो. नाज का महिलाओं के स्वास्थ्य, प्रजनन संबंधी विकारों, मासिक धर्म एवं रजोनिवृत्ति संबंधी समस्याओं तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति से उपचार के क्षेत्र में व्यापक शोध एवं शैक्षणिक अनुभव है। उनके शोध कार्यों में रजोनिवृत्ति से पहले होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव, बांझपन, गर्भाशय ग्रीवा संबंधी विकार, बहुअंडाशयी विकार, रजोनिवृत्ति के दौरान स्वास्थ्य तथा अन्य स्त्री रोग संबंधी समस्याओं का अध्ययन शामिल है। उन्हें वर्ष 2007 में “रजोनिवृत्ति से संबंधित विकारों के उपचार के लिए हर्बल संरचना” के लिए भारतीय पेटेंट भी प्राप्त हुआ।
उनके राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण पत्रिकाओं में 60 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में व्याख्यान दिए हैं। वह यूनानी चिकित्सा से जुड़े विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों में विशेषज्ञ के रूप में भी शामिल रही हैं और वैज्ञानिक सत्रों की अध्यक्षता कर चुकी हैं। उनकी पुस्तक ‘द नेचुरल मेनोपॉज’ वर्ष 2009 में एएमयू प्रेस, अलीगढ़ द्वारा प्रकाशित हुई।
प्रो. नाज ने शैक्षणिक प्रशासन और पेशेवर संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह एएमयू कोर्ट, शैक्षणिक परिषद, संकाय समिति तथा यूनानी चिकित्सा संकाय के अध्ययन मंडल से जुड़ी रही हैं। वह संघ लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की सलाहकार समिति की सदस्य हैं तथा यूनानी चिकित्सा से संबंधित विभिन्न पेशेवर और शोध संस्थाओं से भी ..........................
Prof. Syed Ziaur Rahman delivering the Guest Lecture on Pharmacology of Avicennian Cardiac Drugs at Tashkent, Uzbekistan
एएमयू शिक्षक ने एविसेन्ना की हृदय संबंधी औषधियों की औषधि विज्ञान पर व्याख्यान दिया
अलीगढ़, 22 अगस्तः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलोजी विज्ञान विभाग के प्रो. सैयद जियाउर रहमान को उज्बेकिस्तान के ताशकंद स्थित एविसेन्ना पब्लिक फाउंडेशन द्वारा “एविसेन्ना की हृदय संबंधी औषधियों का औषधि विज्ञान” विषय पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया।
उन्होंने यह व्याख्यान “चिकित्सा के आधुनिक और पारंपरिक स्वरूप में नवाचार एवं निवेश” विषय पर आयोजित 14वें अंतर्राष्ट्रीय एविसेन्ना रीडिंग्स वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक सम्मेलन में दिया। यह सम्मेलन एविसेन्ना के जन्मस्थान बुखारा में उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय, विज्ञान अकादमी और बुखारा क्षेत्रीय प्रशासन के सहयोग से आयोजित किया गया। सम्मेलन का आयोजन एविसेन्ना के जन्म की 1046वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में किया गया था।
अपने व्याख्यान में प्रो. रहमान ने इब्ने सीना की प्रसिद्ध कृति ‘अल-अदविया अल-कल्बिया’ में वर्णित हृदय संबंधी औषधियों के औषधीय गुणों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इन औषधियों के हृदय की रक्षा करने और हृदय को शक्ति प्रदान करने वाले प्रभावों, हृदय की कार्यक्षमता तथा प्राकृतिक ऊष्मा को मजबूत करने, जीवन शक्ति पर प्रभाव, धड़कन की समस्या में राहत तथा रोगी की प्रकृति के अनुसार औषधियों के चयन पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि यूनानी चिकित्सा पद्धति में औषधि का चयन उसकी प्रकृति, हृदय पर उसके विशेष प्रभाव और उचित मात्रा जैसे विभिन्न आधारों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
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