Mufti Salman Bijnauri speaking at Seerat Celebration Programme
अलीगढ़, 26 अगस्तः पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब के जन्मदिवस के अवसर पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कैनेडी हॉल में जश्न-ए-मीलादुन्नबी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने हजरत मुहम्मद साहब के पवित्र जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शों को अपनाने और समाज को शांति, न्याय तथा आपसी सद्भाव का केंद्र बनाने की अपील की। इस अवसर पर देश की सर्वांगीण प्रगति, शांति, सुरक्षा और एकता के लिए दुआ भी की गई।
मौलाना आजाद पुस्तकालय में मौहम्मद साहब के पवित्र जीवन और उनकी शिक्षाओं से संबंधित पुस्तकों, पांडुलिपियों, दुर्लभ वस्तुओं, कुरआन शरीफ की दुर्लभ और अलंकृत प्रतियों तथा इस्लामी सुलेख के नमूनों पर आधारित दो दिवसीय सीरत प्रदर्शनी भी लगाई गई।
कार्यक्रम में दारुल उलूम देवबंद के हदीस शिक्षक मुफ्ती सलमान बिजनौरी और जामिया हैदरिया, खैराबाद, मऊ, उत्तर प्रदेश के प्रधानाचार्य मौलाना नाजिम अली खैराबादी ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एएमयू के सहकुलपति प्रोफेसर मोहम्मद मोहसिन खान ने की।
मुफ्ती सलमान बिजनौरी ने कहा कि मौहम्मद साहब से प्रेम की वास्तविक मांग यह है कि उनके कथन और आचरण को अपने जीवन में उतारा जाए। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को मौहम्मद साहब के जीवन की घटनाओं की जानकारी होनी चाहिए, लेकिन दुख की बात है कि आज उनके जीवन से अनजान लोगों की संख्या काफी है। विशेष रूप से युवाओं को मौहम्मद साहब के कथनों और कार्यों से मार्गदर्शन लेना चाहिए। घर और घर के बाहर सामाजिक व्यवहार तथा जीवन के सभी बाहरी और आंतरिक कार्यों में हमें पैगंबर-ए-इस्लाम के जीवन से सीख लेनी चाहिए।
उन्होंने मोहम्मद साहब के जीवन की विभिन्न घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि वे अपनी पत्नी, बच्चों, रिश्तेदारों, पड़ोसियों, मेहमानों, मेजबानों, निकट साथियों, सेवकों, दिव्यांगों, बुजुर्गों, मुसीबत में पड़े लोगों, गरीबों, जरूरतमंदों, धनवानों, प्रतिष्ठित लोगों, विद्वानों, विवाद लेकर आने वालों, नए मुसलमानों, ग्रामीण लोगों और यहां तक कि जानवरों के साथ भी किस प्रकार प्रेम, दया और सद्भाव का व्यवहार करते थे।
मुफ्ती सलमान बिजनौरी ने कहा कि यदि मोहम्मद साहब के जीवन को समझना है तो कुरआन शरीफ पढ़ना चाहिए, जिसमें इन बातों को स्पष्ट रूप से बताया गया है। मौहम्मद साहब के कथन और आचरण कुरआन शरीफ की व्याख्या हैं।
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